सोनभद्र। भले योगी सरकार जीरो टॉलरेंस की बात करे लेकिन उनके ही कर्मचारी अपने आदत से बाज नही आ रहे है जी हां हम बात कर रहे है लेखपाल की जो ग्रामीणों को 35 किलो मीटर दूर से क्यो आना पड़ा मुख्यालय इसके पीछे कुछ तो जुड़ा हुआ है। समाज कल्याण राज्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र जुगैल का मामला है, जहाँ क्षेत्रीय लेखपाल द्वारा आदिवासियों से वनाधिकार पट्टे की खतौनी देने के नाम पर घूस लेने की मांग की गई है, जिस पर ग्रामीणों ने सोमवार को जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंप लेखपाल द्वारा लिया गया घूस का पैसा वापस कराने, उसकी जाँच कराने और वनाधिकार पट्टे की खतौनी दिलाने की मांग की है। इस दौरान ग्रामीणों ने बताया कि "वह सभी ग्रामीण गरीब, आदिवासी, वनवासी बैगा जाति के है। वह सब गरीब आदिवासी जंगल पहाड़ मे किसी प्रकार से मेहनत मजदूरी करके अपने बाल-बच्चों और परिवार के लिए दो वक्त की रोटी जुटा पाते है। वह सब को वनाधिकारी अधिनियम-2006 के तहत वनाधिकार पट्टा मिला था जिसका ऑनलाईन खतौनी उन लोगों को अभी तक नही मिला है। वह लोग जब अपने क्षेत्रीय "लेखपाल धर्मेन्द्र यादव" से मिले तो उन्होंने कहा पैसा लगेगा तभी आप लोगों को खतौनी मिलेगी। हम सब गरीब आदिवासी इनके बातों में आकर कर्जा लेकर लेखपाल साहब को उनके आवास पर सेक्टर 10 ओबरा मे जाकर हम सभी लोग पैसा दिये। किन्तु अभी तक लेखपाल द्वारा उन लोगों को ऑनलाईन खतौनी नहीं दी गयी तथा और पैसे की माँग की जा रही हैं।" यह वनाधिकार समाज कल्याण से भी जुड़ा है इसमे अधिकारी तत्काल जांच कर गरीबो का हक दिलाये। ज्ञापन के दौरान राजाराम, मनिजर, सतेन्द्र, हरि प्रसाद, बासदेव, संतकुमार, बिहारी, रामअवतार, जय प्रसाद सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।
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