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बाराबंकीः सांस्कृतिक चेतना और अहंकार त्याग का केंद्र है मंदिर- दत्तात्रेय होसबोले


बाराबंकी। मंदिर केवल पूजा का स्थल नहीं बल्कि सांस्कृतिक चेतना का स्रोत और अहंकार त्यागने का स्थान भी हैं।  मंदिरों के कारण शिल्पकला का विकास हुआ और ये सद्भाव, एकाग्रता और समाज में एकत्रीकरण के केंद्र बने हैं।यह बाते बरेठी स्थित भगवान लक्ष्मी नारायण मंदिर का लोकार्पण अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने मौजूद लोगों के बीच मंच से कही। मंदिर का लोकार्पण वैदिक मंत्रों की ध्वनियों के बीच किया गया। इस अवसर पर संस्थान की स्मारिका का विमोचन और वेबसाइट की भी लॉन्चिंग हुई।

सरकार्यवाह ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आत्मनिर्भर भारत की दिशा में काम कर रहे हैं। स्वदेशी, कुटीर और लघु उद्योगों को बढ़ावा देकर देश का नवनिर्माण किया जा सकता है। जीवन में अर्थ का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि धर्म के लिए धन आवश्यक है, लेकिन धन को कभी स्वयं पर हावी न होने दें। जीवन और धन का संबंध नाव और पानी की तरह है।

संत निष्ठा साहब ने सनातन धर्म के मूल्य और सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। संस्थान के संस्थापक प्रभु नारायण एवं पूर्व डीजीपी महेंद्र मोदी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।आईएएस अजय द्विवेदी ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि अजय श्रीवास्तव ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन विपिन सिंह ने किया।इस अवसर पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, राज्यमंत्री सतीश शर्मा, विधायक साकेन्द्र वर्मा, दिनेश रावत, एमएलसी अवनीश सिंह, अंगद सिंह, पूर्व सांसद उपेंद्र सिंह, अरविंद मौर्य, शरद अवस्थी, डॉक्टर विवेक वर्मा, नारायण शर्मा, केडी सिंह, सुधीर गुप्ता, डॉ. ए.के. ठक्कर, विपिन सिंह, अभिषेक गुप्ता, संदीप गुप्ता सहित अन्य गणमान्यजन मौजूद रहे।

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