बदायूं । जनहित में अबैध खनन का भंडाफोड़ करना पत्रकार के लिए भारी पड़ गया। उझानी कस्बा निवासी और स्थानीय अखबार में कार्यरत पत्रकार अंकित चैहान को खनन से जुड़ी खबर छापने के चलते पुलिस उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा। आरोप है कि खबर से नाराज पुलिसकर्मियों ने पहले धमकाया, फिर थाने बुलाकर बेरहमी से पिटाई की और फर्जी मुकदमा दर्ज कर हवालात में डाल दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अंकित चैहान ने उझानी क्षेत्र में रात-दिन चल रहे अबैध खनन पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की थी। रिपोर्ट छपने के बाद खनन में लिप्त पुलिसकर्मी सिपाही कादिर और उमेश बौखला गए। दोनों ने अंकित को फोन कर थाने बुलाया और कोतवाल की मौजूदगी में धमकाया कि ष्अगर दोबारा ऐसी खबर छापी तो जेल भेज दिया जाएगा।ष्
इसके बावजूद, खनन की खबर के असर से पुलिस को दो ट्रैक्टर और एक जेसीबी जब्त करनी पड़ी। इसी से नाराज पुलिसकर्मियों ने गुरुवार रात एक और मौका तलाशा। रात 8 बजे अंकित चैहान एक सड़क दुर्घटना की खबर कवरेज करने बरी बाईपास पहुंचे, जहां राजा नामक युवक से बहस के बाद मारपीट की स्थिति बन गई।
इसी दौरान मौके पर पहुंचे सिपाही कादिर और उमेश ने बिना किसी जांच के अंकित को जबरन थाने ले जाकर कहा, ष्अब तेरी पत्रकारिता निकालते हैं।ष् थाने में कोतवाल ने गला दबाकर और थप्पड़ मारकर बर्बरता से पीटा। सिपाहियों ने भी लात-घूंसे बरसाए, जिससे पत्रकार गंभीर रूप से घायल हो गया। इसके बाद फर्जी धाराओं में मुकदमा दर्ज कर हवालात में डाल दिया गया।
घटना की जानकारी मिलते ही दर्जनों पत्रकार थाने पहुंचे और पुलिस अधीक्षक से बात कर अंकित को रिहा कराया। इसके बाद पत्रकारों का प्रतिनिधिमंडल पुलिस कार्यालय पहुंचा और आरोपी सिपाहियों व राजा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस अधीक्षक ने पूरे मामले की जांच सीओ उझानी को सौंपते हुए निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन दिया।
इस दौरान पत्रकार प्रवेश राठौर, सुमित मल्होत्रा, संजीब पटेल, मुकेश यादव, उदय प्रताप, तेजेंद्र सागर, संदीप तोमर समेत कई पत्रकार मौजूद रहे। पत्रकारों ने कहा कि अगर दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
