बाराबंकी। जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने विस्तृत रिपोर्ट जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से मांगी है। इसको लेकर 16 टीमें गठित कर दी गई हैं, जिसमें बीडीओ, बीईओ, जेई और प्रशासनिक अधिकारी होंगे। यह स्कूलों की जांच कर जर्जर, मरम्मत लायक सहित तमाम कमियों को इंगित करेंगे। लाल रंग से अत्यंत जर्जर विद्यालयों को घेरकर बड़े अक्षरों में निष्प्रयोज्य लिखा जाएगा।
जिले में 2426 परिषदीय थे, जिसमें 141 स्कूलों का युग्मन हो चुका है, अब 2285 स्कूल संचालित हैं। इसमें पूर्व रिपोर्ट के अनुसार लगभग 177 विद्यालय निष्प्रयोज्य घोषित हैं। करीब इतने ही स्कूलों में बाउंड्रीवाल नहीं हैं। मरम्मत लायक 67 विद्यालय हैं, 44 में शौचालयों की कमी है। करीब दो प्रतिशत स्कूलों का कायाकल्प भी नहीं हुआ है, जिसमें शहर के भी विद्यालय शामिल हैं।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने टीम को निर्देशित किया है कि जर्जर भवन का चिह्नांकन करें, बड़े अक्षरों में लाल रंग से निष्प्रयोज्य लिखकर लाल घेरा भी बनाया जाए। इसके अतिरिक्त शौचालय की कमी, मरम्मत लायक भवन, बाउंड्री विहीन, रास्तों की कमी, जलभराव की समस्या, अतिरिक्त कक्षों की कमी आदि की पड़ताल कर रिपोर्ट तैयार करेंगे। 15 दिनों में यह रिपोर्ट बनाकर जिला स्तर पर शासन का भेजी जाएगी।
संतोष देव पांडेय, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने कहा कि सभी शिक्षक और खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित कर दिया गया है कि यदि जर्जर भवन हो तो किसी भी दशा में बच्चों की पढ़ाई न कराई जाए। निष्प्रयोज्य भवनों से बच्चों को दूर रखें। उधर टीमें गठित कर दी गई हैं। एक-एक स्कूल की जांच कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
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