बाराबंकी। श्री रामलीला सिमित द्वारा आयोजित रामलीला मंचन में सोमवार रात राम और शबरी की नवरात्रि भक्ति का मंचन हुआ। जिसे देख दर्शकों की आंखों से बरबस ही आंसू ढरक आये। सोमवार के मंचन में माता सीता की खोज में भटकते हुए जब प्रभु श्रीराम लक्ष्मण के साथ ऋषि मतंग के आश्रम पहुँचे, तो वहाँ वर्षों से अपने आराध्य की प्रतीक्षा कर रही माता शबरी पुष्प बिछाकर मार्ग सजाए बैठी थीं। प्रभु को सामने देखकर उनकी आंखें छलक उठीं, वे रोते हुए राम के चरणों में लिपट गईं। भगवान ने उन्हें स्नेहपूर्वक संभाला तो वातावरण भावनाओं से भर गया।रामलीला मंचन के दौरान यह दृश्य देखते ही मैदान “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंज उठा। माता शबरी ने भावपूर्वक अपने प्रभु को बेर भोग लगाए वह प्रेम जिसमें स्वाद नहीं, समर्पण था। भगवान ने उन्हें स्नेहपूर्वक स्वीकार किया, और इस दृश्य ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। लक्ष्मण ने जब जूठे बेर को लेकर आपत्ति जताई तो श्रीराम ने कहा“यह प्रेम है, यह आस्था है, यह भक्तिभाव है।” समूचा वातावरण भक्ति और करुणा से ओतप्रोत हो उठा। शबरी के बताये गये मार्ग पर चलते चलते प्रभु ऋष्यमूक पर्वत पंहुचने से पहले विप्ररूप में हनुमान से मिलते है, जिसके बाद हनुमान और राम का मिलन होता है, जीवात्मा सुग्रीव से परमात्मा राम की मित्रता हनुमान करवाते है ।राम-शबरी मिलन, सीता खोज और हनुमान भेंट की लीलाओं ने श्रद्धा और संवेदना का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत किया।
हनुमान के रूप में शिवांग पाठक एवं सुग्रीव के रूप में अनुज ने भूमिका निभाई,लीला व्यास की मधुर वाणी में चैपाइयों के साथ लीला का मंचन हुआ इस दौरान अनिल अग्रवाल, रामलखन, शिवकुमार, अभिनव वर्मा, आर्यन, रमेश कुरील, सुधीर जैन,अमर सिंह, आकाश, शैलेन्द्र सिंह,सौरभ गुप्ता,प्रशांत सिंह, करन आदि लोग मौजूद रहे। रामलीला मैदान में हजारों की संख्या में दर्शकों का तांता लगा रहा। भक्ति, प्रेम और त्याग की इन झलकियों ने दर्शकों को धर्म, करुणा और संबद्धता का गहरा संदेश दिया।
