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लखनऊ: उपभोक्ताओं का आरोप! स्मार्ट मीटर के नाम पर बिजली विभाग कर रहा ठगी


लखनऊ । बिजली विभाग में कर्मचारियों की कमी के चलते समय पर खराबी दुरुस्त न हो पाने जरा सा मौसम खराब होने पर कई कई घंटे तक आपूर्ति बाधित होने एवं मीटर रीडर द्वारा नियमित एवं सही रीडिंग न लेने के कारण बिजली बिलों में बढ़ती गड़बड़ी से त्रस्त उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि अब बिजली विभाग द्वारा अब तक की सबसे बड़ी ठगी का नया फार्मूला निकाला गया है तमाम जागरूक लोगों एवं उपभोक्ताओं द्वारा स्मार्ट मीटर का पुरजोर विरोध किया जा रहा है अनेकों खामियों  के नित्य नये किस्से  प्रकाशित होने के बाद भी विभागीय मंत्री एवं शीर्ष अधिकारी इसका गुणगान करते नहीं थकते ।विभाग द्वारा स्मार्ट मीटर की खूबियों कागुणगान करते हुए  इसे उपभोक्ता हित में बताया  उपभोक्ता को लालच देते हुए इसके लिए  खंबे से मीटर तक आर्म्ड केबल विभाग द्वारा उपलब्ध करवाया जा रहा था परंतु पुराना कई जगह से टूटा केवल होने के बाद भी मात्र स्मार्ट मीटर लगाकर खानापूर्ति की जा रही है हद तो तब हो गई जब उपभोक्ता को बिना किसी प्रकार की सूचना दिए उसके मीटर को प्रीपेड कर दिया जा रहा है । संयोजन दिए जाने के दौरान छोटी सी छोटी बात के लिए शपथ पत्र दाखिल करने का आदेश देने वाला विभाग उपभोक्ता की बिना सहमति के बिना किसी लिखित सूचना के किस प्रकार उसका संयोजन प्रीपेड विधा में कर दे रहा हैन्यायिक क्षेत्र में कार्यरत कई अधिकारियों ने इसका तीव्र विरोध करते हुए शीघ्र न्यायालय जाने की बात कही। उपभोक्ता रेनू सिंह द्वारा बताया गया मेरे घर पर स्मार्ट मीटर सरकार का आदेश बता कर जबरदस्ती लगाया गया उन्होंने आउटगोइंग एवं इनकमिंग में किसी भी प्रकार का केबल नहीं दिया पुराने तार पर ही मीटर बांध दिया  लगभग तीन माह तक बिजली का बिल  एवं किसी प्रकार का मैसेज न आने पर विभाग से संपर्क किया  अधिशासी अभियंता कार्यालय एवं मीटर कंपनी एक दूसरे पर आरोप लगाते नजर आए। 

इस संबंध में मीटर कंपनी के प्रभारी अधिकारी द्वारा बताया गया स्मार्ट मीटर लगाए जाने के दौरान पुरानी आईडी बदल जाती है 10 नंबरों का नया कोड डालने पर सारा विवरण उपलब्ध होता है और उससे बिल बन जाता है। 

इसी प्रकार एक अन्य महिला उपभोक्ता संगीता वर्मा का आरोप है वह  10 दिनों के लिए तीर्थ स्थान पर दर्शन करने गई थी इस दौरान अचानक उनके घर की आपूर्ति बंद हो गई  विभाग में दौड़ भाग करने पर ज्ञात हुआ कि उनका मीटर प्रीपेड कर दिया गया है  मीटर की फोटो मांगने नई रसीद ले जाने   एवं दिए गए नंबरों पर निरंतर कॉल करने के उपरांत  मीटर रिचार्ज हुआ जिससे अगले दिन  रात्रि में आपूर्ति बहाल हो सकी। स्मार्ट मीटर की खूबियां बताने वाले विभाग कार्यरत अधिकारी कर्मचारी अपने परिसर पर लगवाने से परहेज करते हैं ।

वही इस संबंध में मुख्यालय से बार-बार मॉनिटरिंग  कर इस व्यवस्था को पुरजोर ढंग से पूरे प्रदेश में लागू करने हेतु कर्मचारियों पर दबाव बनाया जा रहा है  इसके लिए विभाग ने सेवा निवृत कर्मचारियों के परिसर पर स्मार्ट मीटर लगवाने की  कवायद तेज कर दी आनाकानी करने पर उनकी पेंशन एवं अन्य देय रोकने के आदेश जारी कर दिए गए।

पिछले दिनों रजनी खंड उपकेंद्र पर पहुंचे कई उपभोक्ताओं द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई उनके परिसर पर घरेलू संयोजन 2 किलो वाट का स्थापित है परंतु मोबाइल पर एक हफ्ते में लगभग पांच बार आने वाले संदेश में हजारों के बिजली के बिल का अंतर आ रहा हैइस संबंध में रजनी खंड के उपखंड अधिकारी विनोद कुमार द्वारा उपभोक्ता को संतुष्ट नहीं किया जा सका एवं मीटर कंपनी की खामी बता कर पल्ला झाड़ लिया गया।

इस कार्य में लगे ज्यादातर कार्मिक ऐसे हैं जो की परीक्षण खंड से जबरिया निकाले गए हैं हर तरह के दांव-पेंच से परिचित ऐसे कार्मिक उपभोक्ताओं को डरा धमका कर उनके मीटर में टेंपरिंग होने अथवा अन्य खराबी बताकर मुकदमा दर्ज करने एवं भारी भरकम जुर्माना की बात कह कर वसूली कर रहे हैं। वही मनमाफिक सुविधा शुल्क न मिलने पर रसीद पर  गलत विवरण दर्ज करते हैं जिससे उपभोक्ता दैनिक काम काज छोड़कर कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर है।

झटपट पोर्टल पर आवेदन करने के उपरांत वितरण खंड द्वारा पैसा आज जमा करा कर पोर्टल पर  टीएफआर अपलोड कर दी जाती है परंतु 10 से 15 दिनों के बाद उपभोक्ता के परिसर पर कंपनी द्वारा मीटर लगाया जा रहा है वहीं।लेसा के विभिन्न खंडों मे तैनात अधिकारियों द्वारा कुछ खास उपभोक्ताओं को पोस्टपेड संयोजन भी जारी किए गए हैं जिनमें भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं जिनमें अवर अभियंता दिनेश चैहान द्वारा मानसरोवर क्षेत्र में लगाए गए कई संयोजन भी चर्चा में है।


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