जामो/अमेठी। जनपद के विकास खण्ड जामो की ग्राम पंचायत बाजगढ़ी निवासी सुषमा दीदी की कहानी महिला सशक्तिकरण की मिसाल है। समूह में जुड़ने से पहले वे एक सामान्य गृहणी की तरह घर तक ही सीमित थीं। परिवार का भरण-पोषण केवल पति की मजदूरी से होता था, जिससे आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी और परिवार के लिए मूलभूत जरूरतें पूरी करना कठिन हो जाता था।
वर्ष 2021 में ब्लॉक स्तर से आईसीआरपी दीदीयों द्वारा जानकारी दिए जाने पर सुषमा दीदी ने मां लक्ष्मी महिला स्वयं सहायता समूह का गठन किया और अध्यक्ष के रूप में अपनी जिम्मेदारी संभाली। इस समूह के माध्यम से उन्होंने न केवल स्वयं को सशक्त किया बल्कि अन्य महिलाओं को भी जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।
आजीविका मिशन की पहल ने सुषमा दीदी को आगे बढ़ने का मंच दिया। समूह संचालन और लेखा-जोखा की जिम्मेदारी निभाने के साथ ही उन्हें विभिन्न प्रशिक्षण और मार्गदर्शन भी प्राप्त हुआ, जिससे उनकी क्षमताओं का विकास हुआ।
सुषमा दीदी ने आजीविका गतिविधि के रूप में मोमबत्ती निर्माण शुरू किया। उनकी मेहनत और लगन से यह कार्य सफल रहा। वर्तमान में वे प्रतिवर्ष 60,000 से लेकर 1,00,000 तक की आय अर्जित कर रही हैं। इस आय से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
अब परिवार के लोग भी उनका सहयोग करते हैं और पहले की तरह आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ता। इसके साथ ही, सुषमा दीदी अपने ग्राम की अन्य महिलाओं को भी प्रेरित कर रही हैं कि वे समूह से जुड़कर स्वरोजगार अपनाएँ और आत्मनिर्भर बनें।
आज सुषमा दीदी यह साबित कर चुकी हैं कि सही अवसर और दृढ़ निश्चय से महिलाएँ न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार सकती हैं बल्कि समाज में सशक्त पहचान भी बना सकती हैं। वे जनपद की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं। जिलाधिकारी संजय चैहान एवं मुख्य विकास अधिकारी सूरज पटेल ने निर्देशित किया है कि अधिक से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें योजनाओं का लाभ दिलाया जाए। साथ ही, गठित समूहों की आजीविका गतिविधियों में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित की जाए ताकि ग्रामीण महिलाएँ आत्मनिर्भर बनकर समाज और परिवार में सशक्त भूमिका निभा सकें।
