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भूकंप से भारत के पड़ोसी देश में हाहाकार, फिर महसूस हुए झटके


अफगानिस्तान में भूकंप के लगातार झटके महसूस किए जा रहे हैं। गुरुवार को एक बार फिर 4.8 तीव्रता का भूकंप आया। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, यह भूकंप 135 किलोमीटर की गहराई पर आया। NCS ने X पर एक पोस्ट में बताया कि 4 सितंबर 2025 को भारतीय समयानुसार 10:40:56 बजे, 34.38°N अक्षांश और 70.37°E देशांतर पर 135 किमी की गहराई पर, अफगानिस्तान में 4.8 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया।

इससे पहले, बुधवार देर रात भी 4.3 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसकी गहराई सिर्फ 10 किलोमीटर थी। NCS ने अपनी पोस्ट में बताया था, "3 सितंबर 2025 को भारतीय समयानुसार 23:53:44 बजे, 36.86°N अक्षांश और 71.18°E देशांतर पर 10 किमी की गहराई पर, अफ़ग़ानिस्तान में 4.3 तीव्रता का भूकंप आया।"

वहीं, मंगलवार को दक्षिण-पूर्वी हिस्से में 5.5 तीव्रता का भूकंप आया। इससे पहले, अफगानिस्तान के जलालाबाद में रविवार रात 6.0 तीव्रता का भूकंप आया था।

भूकंप से मरने वालों की संख्या अब तक 1411 हो गई है, जबकि घायलों का आंकड़ा 3250 से ज्यादा हो गया है। रविवार को जिस वक्त भूकंप आया तब ज्यादातर लोग सो रहे थे, इस वजह से वे इमारतों के मलबे में दब गए।

उथले भूकंप आमतौर पर गहरे भूकंपों की तुलना में ज्यादा खतरनाक होते हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि उथले भूकंपों से आने वाली भूकंपीय तरंगों की सतह तक पहुंचने की दूरी कम होती है, जिसके परिणामस्वरूप जमीन का कंपन ज्यादा होता है और इमारतों को ज्यादा नुकसान एवं ज़्यादा हताहत होने की संभावना होती है।

खामा प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (WFP) ने अफगानिस्तान के कुनार और नंगरहार प्रांतों में आपातकालीन सहायता भेजी है, जहां 1,400 से ज्यादा लोग मारे गए और 3,000 से ज्यादा घायल हुए हैं। शुरुआती सहायता में खाद्य सामग्री और हाई-एनर्जी बिस्किट शामिल हैं। आगे भी और सहायता और कर्मचारियों को पहुंचाने के लिए अतिरिक्त उड़ानें निर्धारित की गई हैं।

WFP के क्षेत्रीय निदेशक हैराल्ड मैनहार्ड्ट ने तबाही का मंजर बयां करते हुए कहा, "घर मलबे में तब्दील हो गए हैं, सड़कें तबाह हो चुकी हैं, हर तरफ भूस्खलन हुआ है, और दुखद रूप से जानें गई हैं।" उन्होंने बताया कि उनकी टीमें बचाव प्रयासों में जुटी हैं और जरूरतें बढ़ने पर वे अपने अभियान का विस्तार करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, बचाव कार्य में रुकावटें आ रही हैं, क्योंकि सड़कें बंद हैं, इलाका पहाड़ी है और लगातार आफ्टरशॉक्स आ रहे हैं।

भारत ने भी अफगानिस्तान को सहायता भेजी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को X पर एक पोस्ट में बताया था कि भारतीय भूकंप सहायता हवाई मार्ग से काबुल पहुंच गई है। उन्होंने कहा, "भारतीय भूकंप सहायता हवाई मार्ग से काबुल पहुंच गई है। आज 21 टन राहत सामग्री हवाई मार्ग से भेजी गई, जिसमें कंबल, टेंट, स्वच्छता किट, पानी के भंडारण टैंक, जनरेटर, रसोई के बर्तन, पोर्टेबल वाटर प्यूरीफायर, स्लीपिंग बैग, जरूरी दवाएं, व्हीलचेयर, हैंड सैनिटाइजर, वाटर प्यूरीफिकेशन टैबलेट, ओआरएस घोल और चिकित्सा उपभोग्य वस्तुएं शामिल हैं।"

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