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सुप्रीम कोर्ट ने भी माना मेधा पाटकर को दिल्ली के एलजी विनय सक्सेना की मानहानि का दोषी


दिल्ली के एलजी विनय सक्सेना की मानहानि मामले में सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर की दोषसिद्धि को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है, लेकिन मेधा को राहत देते हुए एक लाख रुपए जुर्माना और समय-समय पर कोर्ट में हाजिरी का आदेश हटा दिया है.

साल 2000 के इस मामले में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने मेधा को दोषी ठहराते हुए 5 महीने की कैद और जुर्माने की सजा दी थी. बाद में सेशन्स कोर्ट ने अच्छे आचरण का वादा करने पर उन्हें जेल जाने से छूट दे दी थी. हाई कोर्ट ने दोनों आदेशों को सही ठहराया था. अब सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने भी मेधा को आपराधिक मानहानि का दोषी कहा है.

जिस समय का यह मामला है तब विनय सक्सेना गुजरात की एक संस्था के लिए काम करते थे. मेधा ने उनके ऊपर हवाला कारोबार में शामिल होने समेत कई आरोप लगाए थे. उन्होंने विनय सक्सेना की देशभक्ति पर भी सवाल उठाया था. इस साल अप्रैल में दिए आदेश में निचली अदालत ने माना था कि यह आरोप बेबुनियाद थे. इनके पीछे मकसद लोगों की नजर में विनय सक्सेना की प्रतिष्ठा को गिराना था.

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