प्रतापगढ़/कुंडा। सूबे के मुखिया सीएम एवं जिले के सबसे बड़े अधिकारी जिलाधिकारी के विभाग के कर्मियों ने कुंडा तहसील में गजब का खेल कर डाला। पाकिस्तान गए व्यक्ति की करोड़ो की जमीन को शत्रु संपत्ति घोषित करने बजाय राजस्व अधिकारियों ने लेन-देन करके सात दशक बाद वरासत कर डाला। इस बात की जानकारी जब गांव वालों को हुई तो उन्होंने मामलें की शिकायत अधिकारियों से की लेकिन दोषियों पर कार्यवाही करने के बजाय पूरा विभागीय अमला आरोपियों को बचाने में लगा है।
कुंडा तहसील के कुंडा कोतवाली क्षेत्र के वजीरपुर गांव के रहने वाले साकेन्द्र कुमार सरोज पुत्र सुंदर लाल ने बताया कि उनके गांव के रहने वाले मो.वजीह पुत्र अब्दुल गफ्फार देश विभाजन के समय वर्ष 1947 में पाकिस्तान चले गए थें। पाकिस्तान जाने के बाद गांव में करीब तीन दर्जन बीघा करोड़ो की जमीन उनके नाम दर्ज थी। उस संपत्ति को शत्रु संपत्ति घोषित करने के बजाय वर्ष 2019 में क्षेत्रीय लेखपाल और उसके मुंशी तथा राजस्व अधिकारियों ने मो.वजीह के नाम दर्ज करीब तीन दर्जन बीघा जमीन को उसके भतीजों मो.नईम, मो.कौशर, मो.सलीम, मो.शहजादे, नन्हें नवाब फारूकी पुत्रगण अब्दुल कद्दुस, एवं मो. अहमद फारूकी, मो.जमीन अहमद इत्यादि के नाम वरासत दर्ज कर दिया। साकेन्द्र कुमार का कहना है कि पाकिस्तान गए वजीह की संपत्ति को शत्रु संपत्ति घोषित करने के बजाय उस संपत्ति को वरासत करने की जानकारी जब उसको हुई तो उसने मामलें की शिकायत डीएम से की। डीएम के आदेश पर मौके पर गए जांच अधिकारियों ने भी मामलें की निष्पक्षता से जांच न करके मामलें में लीपापोती कर दी और अपनी भ्रामक जांच आख्या जिलाधिकारी को भेज दी।वरासत दर्ज होने के बाद जमीन को बेचने के कारण वरासत के आदेश पर रोक लगवाने के लिए साकेन्द्र ने तहसीलदार न्यायालय में मुकदमा भी दायर कर दिया है। जिसमें तहसीलदार न्यायालय कुंडा द्वारा वाद के निस्तारण तक वरासत होने के आदेश पर रोक लगा दी गई है। साकेन्द्र का आरोप है कि वर्तमान में विवादित सारी जमीन नगर पंचायत हीरागंज में आ गई है जिससे जमीन की मालियत भी बढ़ गई है। धनबल एवं संख्या बल में अधिक होने के कारण मामलें से प्रभावित व्यक्तियों द्वारा उसको परेशान किया जा रहा है। जिला प्रशासन से उसने सुरक्षा की गुहार लगाई है। इस संबंध में एसडीएम कुंडा वाचस्पति सिंह का कहना है कि शिकायतकर्ता को बुलाकर मामलें की जांच करके कार्यवाही की जाएगी।
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