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105 करोड़ से ज्यादा की हेराफेरी के मामले में रिटायर्ड IAS सेवाली शर्मा के ठिकानों पर ED की रेड


ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ODL) स्कैम के मामले में ED ने आज यानि मंगलवार (5 अगस्त, 2025) को गुवाहाटी में 8 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की. ये कार्रवाई रिटायर्ड IAS अफसर सेवाली देवी शर्मा और उनसे जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत की जा रही है.

सेवाली देवी शर्मा असम सरकार के State Council of Educational Research And Training के ODL सेल की एग्जिक्यूटिव चेयरपर्सन कम डायरेक्टर थीं. उन्हें National Council for Teacher Education की DEl Ed यानी डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन की डिस्टेंस मोड से पढ़ाई कराने की जिम्मेदारी दी गई थी.

सरकार ने सिर्फ 59 मान्यता प्राप्त संस्थानों में 27897 सरकारी टीचर्स को ट्रेनिंग देने की मंजूरी दी थी, लेकिन सेवाली देवी शर्मा ने बिना अनुमति 347 स्टडी सेंटर खोल दिए और कुल 10,6,828 ट्रेनीज को एडमिशन दे दिया. इसका मकसद सिर्फ एक था ज्यादा फीस वसूलना. सेवाली देवी शर्मा ने ODL सेल के नाम से 5 बैंक अकाउंट खुलवाए, जिनमें सिर्फ वही साइन कर सकती थीं. ये अकाउंट असम फाइनेंशियल रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट एक्ट 2005 के खिलाफ था.

इन अकाउंट्स में 115 करोड़ से ज्यादा फीस जमा की गई, जो सीधे सरकारी खजाने में जानी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने ये पैसा प्राइवेट अकाउंट्स में रखकर उसमें से 105 करोड़ से ज्यादा खर्च भी कर दिए वो भी बिना सरकार की मंजूरी के. ED की जांच में ये भी सामने आया है कि काम करने के लिए बिना टेंडर निकाले, बिना किसी विज्ञापन के ठेके दिए गए. ये सारे ठेके उनके अपने रिश्तेदारों और जान-पहचान वालों की कंपनियों को दिए गए. जैसे उनकी बेटी, दामाद और उनके करीबी चार्टर्ड अकाउंटेंट सारंग मोरे.

अधिकतर कंपनियों को ऐसा कोई अनुभव नहीं था कि वे ये काम कर सके फिर भी उन्हें बड़ी रकम दे दी गई. कई मामलों में सामान की सप्लाई नहीं हुई. इसके बावजूद भी पेमेंट कर दिया गया. इस पूरे मामले में सीएम स्पेशल विजिलेंस सेल ने पहले ही FIR दर्ज की हुई है और सेवाली देवी शर्मा समेत कई लोगों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है.

पुलिस की शुरुआती जांच में उनके पास से 5.7 करोड़ से ज्यादा की बेनामी संपत्ति होने के सबूत मिले है. जो उनकी इनकम से कहीं ज्यादा है. अब ED इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रही है, जिसमें सरकारी पैसे का गलत इस्तेमाल कर निजी फायदे के लिए ट्रांजेक्शन किए गए.

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