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प्रतापगढः बाबासाहेब के मूल विचारों में समाहित थी भारत भक्ति - रमेश


प्रतापगढ़। बाबा साहेब अम्बेडकर के जीवन के केंद्र में राष्ट्र था। भारत भक्ति उनके मूल विचारों में समाहित थी। यही कारण रहा कि व्यक्तिगत जीवन में बड़े संघर्ष होने के बाद भी बिना कटुता रखे बाबा साहेब ने हर निर्णय राष्ट्रहित में लिये।बाबा साहेब का नाम लेकर जो लोग राष्ट्र विरोधी गतिविधियों कर रहे है, वे बाबा साहेब के साथ अन्याय कर रहे है। वास्तव में यह बाबा साहेब के साथ विद्रोह है।

उक्त बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की खंड इकाई पट्टी के स्वयंसेवकों द्वारा सामाजिक समरसता के पुरोधा बाबा साहब भीमराव रामजी अंबेडकर की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम को बतौर मुख्य वक्ता सम्बोधित करते हुए आरएसएस के विभाग संघचालक रमेश ने कहीं। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म के प्रति बाबा साहेब की अटूट श्रद्धा थी और वे हिन्दुत्व को ही राष्ट्रीयत्व मानते थे और राष्ट्र भक्ति ही बाबा साहब के जीवन का मूल तंत्र और मंत्र थे।बाबा साहब एक महान व्यक्तित्व थे और उन्हें भारत नहीं बल्कि वैश्विक व्यक्तित्व के रूप में देखा जाना चाहिये। उन्होंने उपेक्षित वर्ग को सम्मान दिलाने का महत्वपूर्ण काम किया। इस मौके पर जिला मार्ग प्रमुख शीतांशु ने कहा कि बाबा साहब ने सामाजिक न्याय दिलाने की दिशा में अपना पूरा जीवन लगा दिया। उन्होंने राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिये ऐसा काम किया कि जिसे विस्मृत नहीं जा सकता है। वो देश की अस्मिता और एकात्मता की रक्षा के लिये संकल्पित थे। कार्यक्रम का शुभारंभ बाबासाहेब के चित्र के समक्ष अतिथियों द्वारा पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए की गई।संचालन आकाश रंजन ने किया ।इस अवसर पर खंड संघचालक रमापति, विभाग गो सेवा संयोजक विनय ,खंड प्रचारक दीपक देव,खंड कार्यवाह सुभाष,खंड शारीरिक शिक्षण प्रमुख भार्गव,आकाश,प्रचार प्रमुख विवेक सहित आदि उपस्थित रहे।

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