अमेठी। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार शिक्षा को लेकर हर रोज सार्थक प्रयास करने की कोशिश कर रही है लेकिन शिक्षा माफिया भी अपनी हठधर्मिता से बाज नहीं आ रहे हैं। यदि हम प्राइवेट पब्लिक स्कूलों की बात करें तो इन्होंने अभिभावकों से मनमाने तरीके से रुपए एंठने के मामले में हद कर रख दी है। हर चीज में रुपए बढ़ा रहे हैं तथा अपनी दुकानदारी चला रहे हैं। इन पर लगाम कसने के लिए सरकार ने कोई ऐसी गाइडलाइन भी जारी नहीं कर रखी है और न ही अभी तक उस पर कोई ध्यान दिखाई दे रहा है।
अब योगी सरकार को कुछ अच्छे फैसले लेने होंगे, लेकिन यह फैसले जब तक पूरी तरह लागू नहीं किए जाएंगे तंब तक सुधार की बात भी बेमानी ही मानी जाएगी
एक ओर जंहा बच्चों के भविष्य को लेकर एक परिवार का मुखिया दिन प्रतिदिन जी तोड़ मेहनत कर बच्चों के उज्जवल भविष्य का सपना संजोता है और प्रयास करता है कि एक दिन उसके बच्चे बेहतर शिक्षा ग्रहण कर परिवार और देश का नाम रोशन करेगें ,लेकिन दूसरी ओर बच्चों के भविष्य से खुलेआम खिलवाड़ करने वाले शिक्षा के ठेकेदारों को बिल्कुल शर्म आने को तैयार नही। जी हां हम बात कर रहें है उत्तर प्रदेश के जनपद अमेठी की यहां शिक्षा के दलालों का खुला खेल खुलेआम देखा जा सकता है, यंहा निजी स्कूलों सहित बुक स्टॉलो के स्वामियों की मनमानी के चलते अभिभावकों की चीख निकल रही है, आलम यह है जनपद के अधिकतर निजी विद्यालयो के द्वारा अभिभावकों को साफ तौर पर अपनी पसंदीदा बुक स्टॉल से ही बच्चों के कोर्स को लेकर फोर्स किया जा रहा है ऐसे मे अगर कोई अभिभावक इनके इस इशारे की अवहेलना करने की कोशिश करता है तो शायद वह कोर्स प्राप्त ही नही कर सकता क्योकिं किसी दूसरे बुक स्टॉल से कोर्स प्राप्त हो ही नही सकता। लोगो की माने तो निजी विद्यालयों का बुक स्टॉलो के स्वामियों से 30 से 50 प्रतिसत कमिशन तय है जिसका सीधा असर अभिभावकों की जेब पर पड़ रहा है। बच्चों के कोर्स को लेकर अभिभावक चिंता मे है मेहनत मजदूरी करने वाले लोगो पर भारी संकट है प्रतिदिन चार - पांच सौ रूपये की मजदूरी करने वाला व्यक्ति आखिर कैसे अपने बच्चों का पालन पोषण करे और कैसे अपने बच्चों को शिक्षा ग्रहण कराये यह एक बड़ा सवाल है?।
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