लखनऊ: शंकर शेष द्वारा लिखित व निशा बेगम द्वारा निर्देशित नाटक फंदा का मंचन सफल रूप से किया गया
April 14, 2025
लखनऊ । शंकर शेष द्वारा लिखित व निशा बेगम द्वारा निर्देशित नाटक फंदी का मंचन वाल्मीकि रंगशाला संगीत नाटक अकादमी परिसर गोमतीनगर लखनऊ में सफल रूप से किया गया। नाटक में यह बताया कि इस समाज और कानून के सामने यह सवाल खड़ा करता है कि कैंसर जैसे असाध्य रोगों से पीड़ित व्यक्ति को इच्छामृत्यु का अधिकार मिलना चाहिए। इस नाटक में केन्द्रीय भूमिका में फंदी जो कि एक कम्पनी में ट्रक चलाता है। उसे स्मलिंग करने के लिए कहा जाता है लेकिन फंदी मना कर देता है। जिसके कारण उसे नौकरी से निकाल दिया जाता है। इधर उसका बाप भगतराम कैंसर से पीड़ित होता है तथा असहनीय पीड़ा के कारण चीखता है चिल्लाता है वह अपने बेटे बहु से खुद को मार डालनेके लिए कहता है गिड़गिड़ता है। नौकरी चले जाने के कारण उसके बालबच्चे दाने-दाने के लिए मोहताज है। फंदी के बाप को केवल बेहोशी का इंजेक्शन लगाने से ही थोड़ी देर को आराम मिलता है लेकिन फंदी के पास वो भी पैसा नही होता है इसलिए वह अपने बाप को दर्द में तड़पते हुए नही देख पाता और उसका गला घोटकर मार देता है। उसे जेल हो जाती हैं। सरकार फंदी को सरकारी वकील मुहैया कराती है फंदी एक वकील का नाम चुनता है जिसका नाम भी भगतराम होता है। वकील भगतराम में आत्मविश्वास की बहुत कमी होती है जिसके कारण वह आज तक कोई केस नही जीत पाता है। वकील भगतराम अपने केस की तैयारी फंदी के साथ करता है लेकिन उसे संतोष जनक परिणाम नही मिलने के कारण शहर के सबसे बड़े वकील को भगतराम की अपनी जगह केस लड़ने के लिए कहता है। गंगाराम इस केस को सुनकर तैयार हो जाते हैं। वकील गंगाराम सरकारी वकील के सभी गवाहों व तर्को का खण्डन करते हुए जज के सामने यह प्रश्न खड़ा करता है कि कानून मनुष्य के लिए होता है या मनुष्य कानून के लिए। कानून मनुष्य को कुछ परेशानियों से बचाने के लिए होता है। लेकिन आज कुछ असाध्य रोगों के आगे विज्ञान भी असहाय है ऐसे में बीमार व्यक्ति दर्द से तड़फता रहता है लेकिन उसे मृत्यु का अधिकार नही होता ऐसे में कानून के सामने एक नया प्रश्न खड़ा होता है कि इस हालात में इच्छा मृत्यु का अधिकार होना चाहिए या नहीं इन्ही प्रश्नों को जज के सामने रखकर फैसला जज के हाथों छोड़ देते है। यहीं पर शंकर शेष की यह रचना कनून और समाज के सामने इसी तरह आवाज उठाता हुआ समाप्त होता है, नाटक में मोहित यादव, ए. एम. अभिषेक, फरमान अली आदि ने भूमिका निभाई।
