अमेठी। होली का त्योहार जैसे जैसे नजदीक आ रहा है। वैसे वैसे मनरेगा कर्मचारियों, मैटेरियल आपूर्ति कर्ता व मजदूरों के माथे पर चिंता की लकीरें और अधिक होती जा रही है। लगभग 19 करोड़ की बकायेदारी ने सभी की मुसीबत बनती जा रही है। मनरेगा कर्मचारियों को पांच माह से मानदेय भी नहीं मिला है।
जिले में मनरेगा को तीन माह से बजट नहीं मिला है। मजदूरों के 36 लाख 42 हजार रुपये की धनराशि में ब्लाकों द्वारा डोंगल न लगाए जाने से ऑनलाइन प्रदर्शित हो रहा है। जबकि विभागीय लोगों का कहना है कि बकाए की धनराशि इससे कहीं अधिक है। डोंगल लगने से ऑनलाइन दिखाई नहीं दे रहा है। मनरेगा के तहत काम करने वाले मिस्त्रियों का एक करोड़ 10 लाख 25 हजार रुपये का मेहनताना बाकी है। इसी प्रकार मैटेरियल आपूर्ति करने वाले दुकानदारों का 15 करोड़ 60 लाख 38 हजार रुपए का बकाया है। एक करोड़ 83 लाख 67 हजार रुपए का टैक्स सहित कुल 18 करोड़ 90 लाख 72 हजार की देनदारी बाकी है। मनरेगा में काम करने वाले कर्मचारियों को धन के अभाव में पांच माह से मानदेय नहीं मिलने से भुखमरी की कगार पर खड़े हैं। त्योहार के पहले योजना को बजट नहीं आवंटित हुआ तो मजदूरों, मैटेरियल आपूर्ति कर्ताओं व कर्मचारियों के लिए होली का रंग फीका हो सकता है। जबकि सूबे के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बीते 07 फरवरी ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय भारत सरकार को अपने पत्र क्रमांक संख्या 04/38-6 के तहत बजट उपलब्ध कराने की मांग किया है। जिससे विकास कार्य प्रभावित न हो सके। इस संबंध में डीसी मनरेगा शेर बहादुर ने कहा कि सरकार द्वारा बजट आवंटन के बाद ही भुगतान की कार्रवाई की जाएगी।
