सब स्टेशन ऑपरेटर ने एक ही फीडर का शटडाउन वापस कैसे कर दिया, जबकि दूसरे कर्मचारी का काम जारी था? 33 केवी अनुभाग के नियंत्रण में संचालित उपकेंद्र की घटना में 11 केवी के अभियंताओं को भी ठहराया गया आंशिक दोषी
लखनऊ। मोहनलालगंज न्यू विद्युत उपकेंद्र के अंतर्गत 29 अक्टूबर 2026 को हुई दर्दनाक विद्युत दुर्घटना में संविदा कर्मचारी राजेश कुमार की मौत के मामले में गठित तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद बिजली विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक ही 11 केवी फीडर पर दो अलग-अलग कार्यों के लिए शटडाउन लिया गया था, तब एक कर्मचारी का कार्य पूरा होने पर दूसरे कर्मचारी का कार्य जारी रहते हुए शटडाउन वापस कैसे कर दिया गया?इस दुर्घटना में संविदा कर्मचारी राजेश कुमार की जान चली गई। घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने संबंधित अवर अभियंता, उपखंड अधिकारी एवं अधिशासी अभियंता मोहनलालगंज के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तर से जांच कराई गई, जिसके क्रम में अधीक्षण अभियंता ब्रह्मपाल की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय समिति ने अपनी जांच आख्या संख्या 1061 दिनांक 03 नवंबर 2026 को प्रस्तुत की है। यह रिपोर्ट मुख्य अभियंता, अमौसी जोन को प्रेषित की जा रही है।
जांच रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों के अनुसार 29 अक्टूबर को 11 केवी मोहनलालगंज टाउन फीडर का पहला शटडाउन शाम 4रू19 बजे संविदा कर्मचारी राजेश कुमार ने एक ट्रांसफार्मर का फ्यूज बांधने के लिए लिया था। इसके बाद इसी फीडर का दूसरा शटडाउन शाम 4रू33 बजे संविदा कर्मचारी महानंद ने नए विद्युत संयोजन की केबल बांधने के लिए लिया।दोनों कर्मचारियों ने 33ध्11 केवी मोहनलालगंज न्यू उपकेंद्र पर तैनात सब स्टेशन ऑपरेटर सुनील कुमार से शटडाउन लिया था।जांच रिपोर्ट के मुताबिक महानंद द्वारा अपना कार्य पूरा होने के बाद शटडाउन वापस करने का अनुरोध किया गया। इसके बाद ऑपरेटर सुनील कुमार ने फीडर का शटडाउन वापस कर दिया, जबकि राजेश कुमार उसी फीडर पर अपना कार्य कर रहे थे और उन्होंने अपना शटडाउन वापस नहीं किया था।फीडर ऊर्जीकृत होते ही राजेश कुमार विद्युत दुर्घटना की चपेट में आ गए। उन्हें प्राथमिक चिकित्सालय ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।यहां सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जब एक ही फीडर पर दो कर्मचारियों के कार्य करने की जानकारी उपकेंद्र के ऑपरेटर को थी, तब दोनों कर्मचारियों के शटडाउन की स्थिति का मिलान किए बिना फीडर को ऊर्जीकृत करने की अनुमति किस आधार पर दी गई
इस प्रकरण का एक और महत्वपूर्ण पहलू उपकेंद्र पर तैनात सब स्टेशन ऑपरेटर की कार्यक्षमता और तैनाती से जुड़ा बताया जा रहा है।संबंधित ऑपरेटर के मानसिक स्वास्थ्य और उपचाराधीन होने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। यदि उसके उपचाराधीन होने तथा नियमित रूप से ड्यूटी करने की स्थिति को लेकर विभाग के पास पूर्व से कोई चिकित्सकीय जानकारी या अभिलेख उपलब्ध थे, तो ऐसे कर्मचारी को संवेदनशील विद्युत उपकेंद्र के संचालन की जिम्मेदारी किस आधार पर दी गई?क्या विभाग ने उसकी चिकित्सकीय फिटनेस और ड्यूटी के लिए उपयुक्तता का परीक्षण कराया था? क्या उपकेंद्र पर तैनाती से पहले आवश्यक सुरक्षा एवं तकनीकी दक्षता का आकलन किया गया था?यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उपकेंद्र का संचालन केवल सामान्य ड्यूटी नहीं, बल्कि ऐसा संवेदनशील दायित्व है, जिसमें एक छोटी सी परिचालन संबंधी चूक किसी कर्मचारी की जान ले सकती है
जांच रिपोर्ट का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू अभियंताओं की जवाबदेही से जुड़ा है।समिति ने 11 केवी एवं एलटी मोहनलालगंज के अवर अभियंता विजय कुमार शर्मा, सहायक अभियंता इंजीनियर सौरभ मौर्य, 33 केवी नादरगंज के अवर अभियंता विनीत कुमार वर्मा तथा सहायक अभियंता रमेश सोनी को अनुरक्षण एवं परिचालन संबंधी दिशा-निर्देशों और मानकों का अनुपालन नहीं कराने तथा पर्यवेक्षणीय दायित्वों के निर्वहन में कमी के दृष्टिगत आंशिक रूप से दोषी माना है।लेकिन यहां विभागीय व्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आता है।विद्युत विभाग की व्यवस्था में 33 केवी विद्युत उपकेंद्रों के संचालन एवं प्रबंधन का नियंत्रण संबंधित 33 केवी अनुभाग के अधिशासी अभियंता के अधीन रहता है। ऐसे में मोहनलालगंज न्यू उपकेंद्र पर तैनात ऑपरेटर की ड्यूटी, परिचालन व्यवस्था, शटडाउन प्रक्रिया और सुरक्षा प्रोटोकॉल की निगरानी किस अधिकारी के नियंत्रण में थी?यदि शटडाउन लेने और वापस करने की प्रक्रिया में उपकेंद्र के ऑपरेटर की सीधी भूमिका थी, तो उसकी परिचालन संबंधी चूक की जिम्मेदारी का निर्धारण किस आधार पर किया गया?दूसरी ओर 11 केवी तकनीकी अनुभाग के अवर अभियंता एवं सहायक अभियंता की पर्यवेक्षणीय जिम्मेदारी किन विशिष्ट नियमों और कार्यादेशों के अंतर्गत निर्धारित थी? क्या जांच समिति ने इन दोनों व्यवस्थाओं के बीच जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन किया है?सवाल यह नहीं कि किसी अधिकारी की जवाबदेही नहीं बनती, बल्कि सवाल यह है कि जवाबदेही वास्तविक नियंत्रण, निर्धारित कार्यक्षेत्र और दुर्घटना के कारणों के आधार पर तय होनी चाहिए।
- जांच रिपोर्ट में किन बिंदुओं पर स्पष्टीकरण जरूरी?
- इस पूरे प्रकरण में मुख्य अभियंता एवं शीर्ष प्रबंधन के समक्ष निम्न सवालों पर स्पष्ट जवाब अपेक्षित हैंकृ
- जब एक ही फीडर पर दो संविदा कर्मचारी अलग-अलग कार्य कर रहे थे, तो शटडाउन वापस करते समय दोनों की स्थिति का सत्यापन क्यों नहीं किया गया?
- क्या शटडाउन लेने और वापस करने का कोई लिखित रजिस्टर, परमिट-टू-वर्क अथवा अन्य सुरक्षा रिकॉर्ड जांच समिति ने परीक्षण में शामिल किया?
- क्या सब स्टेशन ऑपरेटर की चिकित्सकीय फिटनेस एवं संवेदनशील उपकेंद्र पर तैनाती की उपयुक्तता का परीक्षण किया गया था? यदि हां, तो उसका अभिलेख कहां है?
- उपकेंद्र का परिचालन एवं प्रबंधन 33 केवी अनुभाग के नियंत्रण में होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी का निर्धारण किस आधार पर किया गया?
- 11 केवी तकनीकी अनुभाग के अभियंताओं को आंशिक रूप से दोषी ठहराने के लिए समिति ने किन विशिष्ट पर्यवेक्षणीय चूकों और नियमों को आधार बनाया?
- क्या जांच समिति ने ऑपरेटर की भूमिका, उपकेंद्र के परिचालन नियंत्रण और शटडाउन वापसी की प्रक्रिया में हुई चूक को समान गंभीरता से जांचा है?
- कर्मचारी की मौत के बाद भी क्या जवाबदेही का पूरा सच सामने आया?
एक संविदा कर्मचारी अपनी ड्यूटी निभाते हुए विद्युत दुर्घटना का शिकार हो गया और उसकी जान चली गई। जांच रिपोर्ट में शटडाउन वापस किए जाने की घटना का उल्लेख तो है, लेकिन अब यह देखना जरूरी है कि परिचालन संबंधी चूक के लिए जिम्मेदार प्रत्येक स्तर की जवाबदेही किस प्रकार निर्धारित की गई।
किसी भी विभागीय जांच का उद्देश्य केवल कुछ अधिकारियों को आंशिक रूप से दोषी ठहराना नहीं, बल्कि दुर्घटना के वास्तविक कारणों, सुरक्षा व्यवस्था की विफलताओं और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका को स्पष्ट करना होना चाहिए।
इस मामले में शटडाउन वापसी की प्रक्रिया, ऑपरेटर की तैनाती, 33 केवी अनुभाग के नियंत्रण और 11 केवी तकनीकी अनुभाग की वास्तविक जिम्मेदारी का निष्पक्ष एवं स्पष्ट परीक्षण कराया जाए, ताकि मृतक संविदा कर्मचारी को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
