संसद में विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन! अमित शाह को घेरा
August 05, 2026
संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपना विरोध और तेज कर दिया. अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी, प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर विपक्षी दलों ने संसद परिसर में मार्च निकाला. विपक्ष ने गृह मंत्री अमित शाह से सदन में आकर बयान देने और इन मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग की.
विपक्षी दलों का मार्च संसद परिसर स्थित 'प्रेरणा स्थल' पर महात्मा गांधी की प्रतिमा से शुरू होकर संसद भवन के 'मकर द्वार' तक निकाला गया. मार्च में शामिल सांसदों ने हाथों में बड़ा बैनर थाम रखा था, जिस पर "अमित शाह जवाब दो" लिखा था. इस दौरान विपक्षी सांसदों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और आरोप लगाया कि सरकार इन मुद्दों पर जवाबदेही से बच रही है.
इस विरोध मार्च में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव समेत विभिन्न विपक्षी दलों के कई सांसद शामिल हुए.
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विपक्ष की मांग साफ है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सदन में आकर अपना पक्ष रखें. उन्होंने कहा,
"हमारी मांग है कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सदन में आएं, बयान दें. हम चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार हैं. चर्चा से ही समाधान निकलेगा. संसद का सत्र शुरू हुए कई दिन हो चुके हैं, लेकिन वे सदन में नहीं आ रहे हैं. सदन में न आकर वे संसद का अपमान कर रहे हैं."
उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष लगातार चर्चा चाहता है, लेकिन सरकार इस पर सहमत नहीं हो रही है. उनके अनुसार संसद जनता के मुद्दों पर जवाबदेही तय करने का सर्वोच्च मंच है और सरकार को वहीं अपनी बात रखनी चाहिए.
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता में बैठी सरकार जनता के प्रति जवाबदेह होती है. उन्होंने कहा, "इस मार्च का संदेश यही है कि जो लोग सत्ता में हैं, उनकी जनता के प्रति जिम्मेदारी है. यह लोकतंत्र है, तानाशाही या राजदरबार नहीं." उन्होंने आगे कहा कि यदि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ, आंसू गैस छोड़ी गई और लाठीचार्ज हुआ तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए.
प्रियंका गांधी ने कहा, "किसी ने तो ऐसे कदम उठाने का आदेश दिया होगा. इसलिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए. यही लोकतांत्रिक परंपरा है."
विपक्ष का आरोप है कि अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं के कथित चढ़ावे की चोरी और प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के मामले में केंद्र सरकार जवाबदेही से बच रही है. विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार को इन दोनों मामलों पर संसद में विस्तृत बयान देना चाहिए और सदन में चर्चा करानी चाहिए.
