लखनऊ। शिव का सिंगर हमें जीने की कला सिखाता है। यह बात शंकरदास ने विराजखंड गोमतीनगर कालोनी में स्थित विराजेश्वर महादेव मंदिर में श्री राम कथा के दूसरे दिन कहीं। उन्होंने भक्तों को नर्मदेश्वर शिवलिंग भेंट किया।
शंकर दास ने शिव विवाह का गुणगान करते हुए कहा कि श्री रामचरितमानस का हर प्रसंग हमें जीवन जीने की कला सिखाता है। माता सती ने जब अपने पिता दक्ष प्रजापति के यज्ञ में अपना शरीर भस्म किया तो उन्होंने अपना मन शिव जी के चरणों में लगा लिया था। मरते समय इंसान का मन जहां लगा होता है उसकी गति वैसे ही होती है। सती का मन मरते समय शिव जी के चरणों में लगा था इसलिए उनका फिर पार्वती के रूप में जन्म हुआ और उनको दूसरे जीवन में भी शिव जी पति के रूप मिले।
शंकर दास ने कहा शिव का श्रृंगार हमें जीने की कला सिखाता है। शिव जी की जटाएं हमें बताती है कि सफलता पाने के लिए हमें अपने विचारों को एकजुट कर लेना चाहिए। शिव जी के शरीर पर लगा हुआ भस्म हमें सिखाता है इंसान घमंड मत करे क्योंकि अंत में उसका भस्म हो ही सत्य है।
उन्होंने कहा प्रभु तक पहुंचाने के लिए बहुत से मार्ग है लेकिन सबसे आसान मार्ग भक्ति है। राम जी ने स्वयं बताया कि भक्ति पाने के लिए सत्संग करना होता है। इस कलयुग में सत्संग पाना बहुत दुर्लभ है तो भक्ति पानी का दूसरा रास्ता शिव जी ने बताया। शंकर जी कहते हैं राम कथा हमें भक्ति देती है।मंदिर के प्रबंधक आशुतोष उपाध्याय ने बताया मंगलवार को श्री राम जी का प्राकट्य उत्सव मनाया जाएगा।
कथा में के एन राय, अमरनाथ राय, सदानंद मिश्रा, अरूणेंद्र त्रिपाठी, अमरजीत सिंह, राजीव त्रिपाठी सहित काफी संख्या में भक्ति करो उपस्थित थे।
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