राजस्थान के सरकारी स्कूलों में वीडियो-फोटोग्राफी और बाहरी लोगों पर बैन
August 18, 2026
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों की एंट्री, फोटो, वीडियो और इंटरव्यू को लेकर जारी आदेश ने सियासी विवाद खड़ा कर दिया है। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल अब शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बयान को लेकर उठ रहा है। शिक्षा मंत्री खुद कह रहे हैं कि 'कुछ लोगों से सुन रहा हूं कि सरकार ने विद्यालय में किसी के जाने और रिकॉर्डिंग करने पर प्रतिबंध लगाया है।' यानी जिस विभाग से यह आदेश जारी हुआ, उसी सरकार के शिक्षा मंत्री इस बात को “सुना है” कहकर बता रहे हैं। हालांकि, मंत्री ने इसके बाद सफाई दी कि सरकार ने पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया है। बच्चों की सुरक्षा व निजता को ध्यान में रखते हुए नियम बनाए गए हैं।
माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से 16-17 अगस्त को जारी आदेश में सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश और गतिविधियों को लेकर कई दिशा-निर्देश दिए गए हैं। किसी बाहरी व्यक्ति को फोटो, वीडियो, इंटरव्यू या लाइव स्ट्रीमिंग के लिए स्कूल के प्रधानाचार्य से पूर्व लिखित अनुमति लेना जरूरी होगा। मालूम हो कि राजस्थान के सरकारी स्कूलों में कई तरह की खामियां पाई जा रही हैं, इसका विरोध प्रदर्शन स्कूल के ही छात्र कर रहे हैं।
स्कूल परिसर में आने वाले हर बाहरी व्यक्ति की जानकारी विजिटर रजिस्टर में दर्ज होगी। अनुमति मिलने के बाद भी वह अकेले स्कूल परिसर में नहीं घूम सकेगा। उसे शिक्षक, स्टाफ या प्रधानाचार्य के साथ ही रहना होगा।
क्लासरूम, टॉयलेट, लैब और हॉस्टल जैसे स्थानों पर बाहरी व्यक्ति के अकेले जाने पर रोक रहेगी। शिक्षा विभाग ने बच्चों की सुरक्षा और निजता के लिए ‘इन लोको पेरेंटिस’ यानी माता-पिता के स्थान पर जिम्मेदारी निभाने के सिद्धांत का भी हवाला दिया है।
लेकिन आदेश सामने आने के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बयान की हो रही है। सवाल यह है कि जब आदेश शिक्षा विभाग की ओर से जारी हुआ है, तो शिक्षा मंत्री खुद इसे लेकर कह रहे हैं कि उन्होंने इसके बारे में “सुना है।”
शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार ने स्कूलों में किसी के जाने और रिकॉर्डिंग करने पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया है। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है और नाबालिग बच्चों की फोटो लेने या बाइट लेने से पहले अभिभावकों की अनुमति जरूरी है। मंत्री के मुताबिक जब बच्चे स्कूल में होते हैं तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी शिक्षकों की होती है। स्कूल प्रबंधन समिति और अभिभावक-शिक्षक बैठक के जरिए भी बच्चों की सुरक्षा पर नजर रखी जाती है।
