नागालैंड बाढ़ में फंसी 53 साल की हथिनी जॉयमोती का रेस्क्यू
August 22, 2026
नागालैंड में बाढ़ में फंसी एक हथिनी को स्पेशल हॉस्पिटल केयर के लिए वंतारा एयरलिफ्ट किया गया है। 53 साल की हथिनी जॉयमोती के शरीर में कई गंभीर चोटें हैं। इनमें उसके माथे, दाहिने कान और पूंछ के ऊपर के हिस्से की चोट शामिल हैं। इसके अलावा हथिनी की बाईं जांघ के अंदर और पेट पर घाव है। उसके बाहरी प्राइवेट पार्ट के आसपास एक गहरा, कीड़ों से भरा घाव भी है।
जुलाई के दूसरे हफ्ते में नागालैंड में बाढ़ के पानी में जॉयमोती बह गई थी और बाद में सरकारी एजेंसियों की मदद से लोकल कम्युनिटी ने उसे बचाया। इस घटना में उसे कई चोटें आईं, जिसमें उसकी दाहिनी आंख बुरी तरह डैमेज हो गई है, जिससे वह उस आंख से अंधी हो गई है और लगातार आंसू बह रहे हैं। उसके बाईं तरफ पिछले पैर में भी लंबे समय से लंगड़ापन है, जो लॉगिंग के दौरान हुए फ्रैक्चर की वजह से है, जिससे उसके चलने और खाने-पीने की क्षमता पर असर पड़ता है।
जॉयमोती को रेस्क्यू के बाद लोकल लेवल पर फर्स्ट एड और प्राइमरी वेटेरिनरी केयर मिली, जिसमें घाव पर पट्टी बांधना, दर्द की दवा, मल्टीविटामिन और मिनरल सप्लीमेंट और सपोर्टिव ट्रीटमेंट शामिल था। हालांकि, उसकी चोटों की गंभीरता, बढ़ती उम्र और चलने-फिरने में दिक्कतों को देखते हुए, उसे तुरंत एक खास हॉस्पिटल में इलाज की जरूरत है।
वंतारा में जॉयमोती का ट्रांसफर सिर्फ खास वेटेरिनरी ट्रीटमेंट के लिए है। उसे एयरलिफ्ट करने का फैसला सेंटर में उसकी भलाई और मेडिकल जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया है। अगर उसे जमीनी रास्ते से अस्पताल तक लाया जाता तो इसमें काफी समय लगता। हथिनी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। वंतारा में जॉयमोती पूरा असेसमेंट किया जाएगा और उसकी चोटों और आंखों की कंडीशन के लिए खास ट्रीटमेंट दिया जाएगा, साथ ही जरूरत के हिसाब से न्यूट्रिशनल और सपोर्टिव केयर भी दी जाएगी।
इंटेंसिव हॉस्पिटल केयर के लिए भारत में पहली बार किसी हाथी को एयर ट्रांसपोर्ट किया गया है। इसके लिए बड़े पैमाने पर वेटेरिनरी, जानवरों की देखभाल और लॉजिस्टिक तैयारी की जरूरत होती है। जॉयमोती के ट्रांसफर की प्लानिंग और काम हर स्टेज पर उसकी हेल्थ, आराम और सेफ्टी का ध्यान रखते हुए किया गया। यात्रा से पहले उसके वेटेरिनरी असेसमेंट और तैयारी से लेकर लोडिंग, फ्लाइट के दौरान मॉनिटरिंग और हॉस्पिटल पहुंचने तक हर जरूरत का ध्यान रखा गया।
एयर ट्रांसपोर्ट किसी जानवर के लिए लंबी दूरी की यात्रा का समय काफी कम कर सकता है, जिसे तुरंत मेडिकल मदद की जरूरत हो। गंभीर चोटों, पुरानी हेल्थ प्रॉब्लम या चलने-फिरने में दिक्कत वाले हाथियों के लिए, यात्रा का समय कम करना और लंबी जमीनी यात्रा से बचना उनकी वेलफेयर की सुरक्षा के लिए जरूरी है। जॉयमोती की कहानी इस बात पर जोर देती है कि वाइल्डलाइफ इमरजेंसी वाली जगहों के पास खास वेटेरिनरी केयर सुविधाओं की जरूरत है। जॉयमोती का मामला इस बात पर भी जोर देता है कि उन इलाकों के पास खास हाथी वेटेरिनरी केयर सुविधाएं होना जरूरी है, जहां हाथी बाढ़, इंसानों के साथ टकराव और दूसरी हेल्थ इमरजेंसी से प्रभावित होते हैं।
