जामो/अमेठी। थाना जामो के चर्चित एफआईआर संख्या 460/2016 धारा 419, 420, 467, 468, 471 व एफआईआर 592/2016 धारा 419, 420, 406 के मामले में बुधवार को बड़ी प्रगति हुई। मामले की सुनवाई माननीय न्यायाधीश सोनाली सोनी जी की अदालत में हुई। अदालत में चार्ज फ्रेम के लिए प्रपत्र दाखिल किया गया। न्यायाधीश ने आरोपी शिव महेश पांडे को कागजात देते हुए हस्ताक्षर करने को कहा, जिस पर आरोपी ने अपने अधिवक्ता को बुलाने की बात कही। बताया जाता है कि लगभग ढाई साल से यह मामला चार्ज वह फ्रेम के स्तर पर लंबित था। न्यायालय ने अब अगली तिथि 19 अगस्त 2026 नियत की है। चार्ज फ्रेम के बाद मामले का ट्रायल शुरू होगा। क्या है मामला -यह मामला वर्ष 2016 का है। मकान नंबर 536 के परिवार रजिस्टर में जालसाजी, धोखाधड़ी व कूटरचना का आरोप है। आरोप है कि अपने भाइयों के कम पढ़े-लिखे होने का फायदा उठाकर परिवार रजिस्टर में फर्जी तरीके से नाम अंकित कराए गए और अजन्मे बच्चे तक के नाम बैनामा कराया गया। एफआईआर 460/16 की विवेचना क्राइम ब्रांच तक पहुंची थी। कई पुलिस अधीक्षकों व क्षेत्राधिकारियों के पर्यवेक्षण में क्राइम ब्रांच के विवेचकों ने जांच की थी। उस समय अमेठी में अनीस अहमद अंसारी, पूनम, हीरालाल, कुंतल किशोर गहलोत व अनुराग आर्य बतौर पुलिस अधीक्षक तैनात रहे हैं। वादी पक्ष का कहना है कि पत्रावली में अभिलेखीय साक्ष्य आज भी मौजूद हैं। जैसे बैनामा वर्ष 1981 में हुआ जबकि बच्चे का जन्म 1982 में दर्शाया गया है। खंड शिक्षा अधिकारी वरुण कुमार ने एक आरटीआई के जवाब में लिखित में दिया है जो केस डायरी में यह प्रपत्र मौजूद है आरोप है कि शिव महेश पांडे ने अपना नाम तथा रमापति पांडे ने राम लाली और कमलापति का नाम जालसाजी व धोखाधड़ी से अंकित कराया था, जो 3ध्7ध्96 को निरस्त हो गया था।इसी प्रकरण में उप जिलाधिकारी न्यायालय में 6ए का वाद चला, जिसमें ग्राम पंचायत अधिकारी व सहायक विकास अधिकारी की रिपोर्ट में भी जालसाजी की बात सामने आई। उप जिलाधिकारी न्यायालय ने शिव महेश पांडे का वाद खारिज करते हुए जालसाजी मानते हुए जुर्माना लगाया तथा दोबारा वाद न लाए जाने के लिए निषेधित किया था। बताया जाता है कि उच्च न्यायालय ने भी उप जिलाधिकारी न्यायालय के फैसले को उचित ठहराया है। मकान नंबर 536 में जलसाजी की धोखाधड़ी और अजन्मे बच्चे के नाम बैनामा जनपद का यह एक प्रसिद्ध मामला है।
जामो: अगली तारीख 19 अगस्त! चर्चित जालसाजी मामले में चार्ज फ्रेम की कार्यवाही शुरू
August 06, 2026
जामो/अमेठी। थाना जामो के चर्चित एफआईआर संख्या 460/2016 धारा 419, 420, 467, 468, 471 व एफआईआर 592/2016 धारा 419, 420, 406 के मामले में बुधवार को बड़ी प्रगति हुई। मामले की सुनवाई माननीय न्यायाधीश सोनाली सोनी जी की अदालत में हुई। अदालत में चार्ज फ्रेम के लिए प्रपत्र दाखिल किया गया। न्यायाधीश ने आरोपी शिव महेश पांडे को कागजात देते हुए हस्ताक्षर करने को कहा, जिस पर आरोपी ने अपने अधिवक्ता को बुलाने की बात कही। बताया जाता है कि लगभग ढाई साल से यह मामला चार्ज वह फ्रेम के स्तर पर लंबित था। न्यायालय ने अब अगली तिथि 19 अगस्त 2026 नियत की है। चार्ज फ्रेम के बाद मामले का ट्रायल शुरू होगा। क्या है मामला -यह मामला वर्ष 2016 का है। मकान नंबर 536 के परिवार रजिस्टर में जालसाजी, धोखाधड़ी व कूटरचना का आरोप है। आरोप है कि अपने भाइयों के कम पढ़े-लिखे होने का फायदा उठाकर परिवार रजिस्टर में फर्जी तरीके से नाम अंकित कराए गए और अजन्मे बच्चे तक के नाम बैनामा कराया गया। एफआईआर 460/16 की विवेचना क्राइम ब्रांच तक पहुंची थी। कई पुलिस अधीक्षकों व क्षेत्राधिकारियों के पर्यवेक्षण में क्राइम ब्रांच के विवेचकों ने जांच की थी। उस समय अमेठी में अनीस अहमद अंसारी, पूनम, हीरालाल, कुंतल किशोर गहलोत व अनुराग आर्य बतौर पुलिस अधीक्षक तैनात रहे हैं। वादी पक्ष का कहना है कि पत्रावली में अभिलेखीय साक्ष्य आज भी मौजूद हैं। जैसे बैनामा वर्ष 1981 में हुआ जबकि बच्चे का जन्म 1982 में दर्शाया गया है। खंड शिक्षा अधिकारी वरुण कुमार ने एक आरटीआई के जवाब में लिखित में दिया है जो केस डायरी में यह प्रपत्र मौजूद है आरोप है कि शिव महेश पांडे ने अपना नाम तथा रमापति पांडे ने राम लाली और कमलापति का नाम जालसाजी व धोखाधड़ी से अंकित कराया था, जो 3ध्7ध्96 को निरस्त हो गया था।इसी प्रकरण में उप जिलाधिकारी न्यायालय में 6ए का वाद चला, जिसमें ग्राम पंचायत अधिकारी व सहायक विकास अधिकारी की रिपोर्ट में भी जालसाजी की बात सामने आई। उप जिलाधिकारी न्यायालय ने शिव महेश पांडे का वाद खारिज करते हुए जालसाजी मानते हुए जुर्माना लगाया तथा दोबारा वाद न लाए जाने के लिए निषेधित किया था। बताया जाता है कि उच्च न्यायालय ने भी उप जिलाधिकारी न्यायालय के फैसले को उचित ठहराया है। मकान नंबर 536 में जलसाजी की धोखाधड़ी और अजन्मे बच्चे के नाम बैनामा जनपद का यह एक प्रसिद्ध मामला है।
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