विधान केसरी कार्यालय पहुंचे 'सबका दल यूनाइटेड' के राष्ट्रीय अध्यक्ष, जन सेवा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनेश ठाकुर 'कर्पूरी' की कार्यशैली को सराहा
लखनऊ। 'सबका दल यूनाइटेड' के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रमोद लोधी ने 'विधान केसरी' कार्यालय का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने 'विधान केसरी' के प्रधान संपादक और 'जन सेवा दल' के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनेश ठाकुर 'कर्पूरी' से मुलाकात कर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर गंभीर चर्चा की.
बैठक के दौरान प्रमोद लोधी ने आगामी चुनावी रणनीतियों और सामाजिक चेतना पर ज़ोर देते हुए कहा, "चुनाव में मात्र 120 दिन बचे हैं और मैं अपने समाज के सहयोग से तेजी से सत्ता का रास्ता तय कर रहा हूँ। समाज के लोगों ने मेरे लिए पलक-पावड़े बिछा रखे हैं।"
निर्णायक भूमिका में आए समाज: प्रमोद लोधी
लोधी समाज में नेतृत्व की क्षमता का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि समाज में नेताओं की कमी नहीं है और सभी लोग अच्छे हैं, लेकिन वे कुछ अलग करना चाहते हैं। उन्होंने स्वतंत्र रूप से काम करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा:
वोट के आधार पर सत्ता: लोग अपने मत की ताकत को समझें, सत्ता में आएं और स्वतंत्र रूप से काम करें।
आर्थिक संपन्नता: किसान, नौजवान, मजदूर और कामगार वर्ग को आर्थिक रूप से संपन्न बनाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।
नीतियों की मजबूरी: हमारे लोग मंत्री, संत्री और विधायक तो बन जाते हैं, लेकिन निर्णायक भूमिका में नहीं आ पाते। जो लोग पदों पर बैठते हैं, उन्हें अपनी पार्टी की नीतियों पर चलना पड़ता है और उन पार्टियों की नीतियां कैसी हैं, यह समाज का बच्चा-बच्चा जानता है।
जातियों को जोड़कर 'जमात' बनाने का आह्वान
विनेश ठाकुर 'कर्पूरी' की कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए प्रमोद लोधी ने एक बड़े सामाजिक गठबंधन का खाका खींचा। उन्होंने कहा कि यदि नंदवंशी, लोधी समाज, वाल्मीकि, कोरी, सैनी, कश्यप और विश्वकर्मा जैसी सभी जातियों का आपसी सहयोग और समन्वय मिल जाए, तो हम आसानी से 100 से ज्यादा सीटें जीतकर एक बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में उभर सकते हैं।
"मैं छोटी सी उम्र में ही सभी राजनीतिक पार्टियों को अंदर तक जान चुका हूँ। वहाँ हर कोई अपने-अपने जुगाड़ में दिखाई पड़ता है। इसलिए, स्वार्थी दलों को जोड़कर गठबंधन करने से कहीं बेहतर है कि हम जातियों को जोड़कर एक मजबूत जमात बनाने का काम करें, ताकि हम खुद मालिक बन सकें और हमें किसी अन्य पर निर्भर न रहना पड़े।
