बीसलपुर। थाना बीसलपुर क्षेत्र के पटेल नगर में हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। एक निर्माणाधीन मकान में शटरिंग खोलते समय अचानक पूरा ढांचा भरभराकर गिर पड़ा, जिसके नीचे दबकर एक मजदूर की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने जान जोखिम में डालकर मलबे में दबे मजदूरों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक एक परिवार का सहारा हमेशा के लिए खत्म हो चुका था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पटेल नगर निवासी 55 वर्षीय रामचंद्र निर्माणाधीन मकान में मजदूरी कर रहे थे। मंगलवार को मकान की शटरिंग हटाने का कार्य चल रहा था। इसी दौरान अचानक शटरिंग और बीम का पूरा ढांचा तेज धमाके के साथ नीचे आ गिरा। हादसा इतना भयानक था कि आसपास के लोग दहशत में घरों से बाहर निकल आए। देखते ही देखते पूरा क्षेत्र लोगों की भीड़ से भर गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक मजदूरों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। भारी भरकम मलबा सीधे उनके ऊपर आ गिरा। कई मजदूर दब गए और उनकी चीखें सुनकर लोग दौड़ पड़े। स्थानीय लोगों ने बिना समय गंवाए राहत कार्य शुरू किया और पुलिस को सूचना दी। काफी मशक्कत के बाद मजदूरों को बाहर निकाला गया।
मलबे से निकाले गए रामचंद्र की हालत बेहद गंभीर थी। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। वहीं घायल बुद्धसेन, वीरेंद्र और बृजपाल को एंबुलेंस से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीसलपुर भेजा गया, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार कुछ घायलों की हालत चिंताजनक बनी हुई है।हादसे की सूचना मिलते ही थाना बीसलपुर के एसएसआई रमेश चंद्र शर्मा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचायतनामा भर पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेज दिया। घटना के बाद क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल बना रहा।
बताया जा रहा है कि यह निर्माणाधीन मकान राजेश उर्फ अरविंद एडवोकेट का है। हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं किया गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में लापरवाही बरती जा रही थी और मजदूरों की सुरक्षा के लिए कोई पर्याप्त इंतजाम नहीं थे।
हादसा इतना भयावह था कि मकान का बीम और दीवार गिरने से भारी मात्रा में मलबा सड़क पर फैल गया। इससे मुख्य मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। पुलिस ने जेसीबी और स्थानीय लोगों की मदद से सड़क से मलबा हटवाया, जिसके बाद यातायात सुचारु हो सका।
कोतवाल संजीव शुक्ला ने बताया कि मामले में अभी तक किसी की ओर से तहरीर नहीं दी गई है। तहरीर मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
घटना के बाद भवन स्वामी के मौके से गायब होने को लेकर भी लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली। पुलिस और स्थानीय लोग लगातार भवन मालिक की तलाश करते रहे, लेकिन वह कहीं नहीं मिला। लोगों ने कई बार उसके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया, मगर फोन रिसीव नहीं हुआ। मोहल्ले के कई लोग भी भवन मालिक का नाम खुलकर बताने से बचते नजर आए।
हालांकि बाद में भवन स्वामी ने फोन पर बताया कि वह जरूरी काम से प्रयागराज गए हुए हैं और बुधवार को बीसलपुर लौटेंगे। उन्होंने कहा कि मृतक रामचंद्र उनके करीबी रिश्तेदार थे और इस हादसे से वह बेहद दुखी हैं।
इस हादसे ने एक बार फिर निर्माण स्थलों पर मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या निर्माण कार्य बिना तकनीकी निरीक्षण और सुरक्षा इंतजामों के कराया जा रहा था? क्या मजदूरों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे? यदि निर्माण मानकों का पालन किया गया होता तो शायद एक मजदूर की जान बच सकती थी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को निर्माण कार्यों की नियमित जांच करनी चाहिए ताकि इस तरह के हादसों पर रोक लग सके। मजदूरों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी उठने लगी है।
हादसे को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। एसडीएम नागेंद्र पांडेय ने पूरे प्रकरण की जांच तहसीलदार हबीब उर रहमान को सौंपी गई है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं तथा हादसे के लिए किसकी लापरवाही जिम्मेदार है।
एसडीएम ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही मृतक मजदूर के परिजनों को शासन की बीमा एवं सहायता योजनाओं के तहत आर्थिक मदद दिलाने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। प्रशासन ने घायलों के बेहतर उपचार का भरोसा भी दिया है।

