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सामने आई सच्चाई! 32 मिनट तक बैंक में मारा-मारा फिरते रहे जीतू, फिर बहन का कंकाल लेकर पहुंचे


ओडिशा के क्योंझर जिले से सामने आया जीतू मुंडा का मामला अब और भी गंभीर हो गया है। अपनी मृत बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचने वाले इस आदिवासी युवक के मामले में शुरुआती जांच में बैंक की बड़ी लापरवाही सामने आई है। जांच में साफ संकेत मिले हैं कि युवक को मजबूरी में ऐसा कदम उठाना पड़ा।

मामले की जांच के लिए उत्तरी संभाग के राजस्व आयुक्त यानी आरडीसी संग्राम केशरी महापात्रा खुद बैंक पहुंचे। उनके साथ जिला कलेक्टर विशाल सिंह और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे। उन्होंने बैंक की मालिपोसी शाखा में जाकर सीसीटीवी फुटेज की जांच की और बैंक अधिकारियों से पूछताछ की। मोहापात्रा ने बताया कि सीसीटीवी में ऑडियो नहीं होने के कारण यह साफ नहीं हो पाया कि बैंक कर्मचारियों ने युवक से क्या कहा, लेकिन शुरुआती जांच में यह जरूर सामने आया कि बैंक ने सहयोग नहीं किया और लापरवाही बरती।

आरडीसी संग्राम केशरी महापात्रा ने कहा, "मैंने और जिलापाल ने लगभग 1 घंटे तक सीसीटीवी फुटेज का आकलन किया है। प्राथमिक जांच में पता चल रहा है कि बैंकिंग कर्मचारियों के तरफ से गैरजिम्मेदारी हुई है और जीतू को वापस लौटाया गया है। चूंकि सीसीटीवी कैमरे का ऑडियो उपलब्ध नहीं है लिहाजा बातचीत क्या हुई, यह समझ नहीं आ रहा। लेकिन सीसीटीवी में दिख रहे बॉडी लेंग्वेज से पता चल रहा है, वे बैंक में 11:26 से 11:58 तक मौजूद थे। इस बीच वे चार बार बैंक मैनेजर से लेकर कैशियर तक सबके पास गए। इससे पता चल रहा है कि बैंक कर्मचारियों के लौटा देने बाद ही वे निराश होकर बैंक से निकले हैं। पूरी बातचीत क्या हुई यह पता तो नहीं चल रहा लेकिन सीसीटीवी में दिख रहा है कि जीतू मुंडा के साथ एक और व्यक्ति भी हैं जो समझदार दिख रहे हैं।

दरअसल, जीतू मुंडा अपनी बहन कलारा मुंडा के खाते से करीब 19 हजार रुपये निकालना चाहते थे। उनकी बहन की फरवरी में मृत्यु हो चुकी थी और उनका कोई कानूनी वारिस नहीं था। बैंक अधिकारियों ने पैसे देने से इनकार कर दिया और मृत्यु प्रमाण पत्र व कानूनी वारिस प्रमाण पत्र लाने को कहा। अंत में बैंक मैनेजर ने उन्हें बैंक से जाने के लिए कह दिया। इससे नाराज होकर जीतू मुंडा ने अपनी बहन के शव को कब्र से निकालकर उसका कंकाल बैंक में लाकर दिखाया, ताकि वह उसकी मौत साबित कर सकें। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। महापात्रा ने इस घटना को “बेहद शर्मनाक” बताया और कहा कि बैंक कर्मचारियों ने लापरवाही दिखाई, जबकि वे जीतू मुंडा और उनकी बहन को पहले से जानते थे। दोनों पहले भी कम से कम आठ बार बैंक आ चुके थे और पैसे का लेन-देन कर चुके थे।

हालांकि, बैंक अधिकारियों ने पहले इस बात से इनकार किया था कि उन्होंने युवक को शव लाने के लिए कहा था। उन्होंने यह भी दावा किया कि जीतू मुंडा नशे की हालत में थे और उन्हें बैंक प्रक्रिया की जानकारी नहीं थी। बैंक का कहना है कि युवक ने प्रक्रिया को समझने से इनकार कर दिया। बाद में जब मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी वारिस प्रमाण पत्र जारी किए गए, तब बैंक ने 19,402 रुपये की राशि का भुगतान कर दिया।

जांच के दौरान राजस्व आयुक्त ने यह भी सवाल उठाया कि फरवरी में मौत होने के बावजूद लगभग तीन महीने तक मृत्यु प्रमाण पत्र क्यों जारी नहीं किया गया। साथ ही उन्होंने बैंक से यह भी पूछा कि जब वे ग्राहक को जानते थे, तो उसे सही मार्गदर्शन क्यों नहीं दिया गया। फिलहाल प्रशासनिक जांच जारी है, जिसमें बैंक और स्थानीय रजिस्ट्रार दोनों की भूमिका की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि जो भी इस मामले में दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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