बीएमएम प्रदीप जायसवाल व समूह कर्मचारी पूजा पर गंभीर आरोप लगाई है।
सोनभद्र। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति के दावों के बीच सोनभद्र में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों पर कार्रवाई की रफ्तार सवालों के घेरे में है। विकास खंड घोरावल के शाहगंज क्षेत्र में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत चल रही योजनाओं में घोटाले और रिश्वतखोरी के आरोप सामने आने के बाद जांच के आदेश तो दे दिए गए, लेकिन 12 दिन बीत जाने के बाद भी जांच आगे नहीं बढ़ पाई है। इससे पीड़ित समूह सखियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीडीओ जागृति अवस्थी ने डीडीओ और संबंधित बीडीओ की दो सदस्यीय जांच टीम गठित की थी, लेकिन अब तक जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं दिखी है। बताते चलें कि बीते 5 अप्रैल को घोरावल के शाहगंज स्थित बुद्धा स्वयं सहायता समूह कार्यालय पर बड़ी संख्या में समूह सखियां पहुंचीं और बीएमएम प्रदीप जायसवाल व समूह कर्मचारी पूजा पर गंभीर आरोप लगाए। सखियों का कहना है कि उनसे डीसी एनआरएलएम के नाम पर रिश्वत मांगी जाती थी। वहीं विरोध करने पर मानदेय रोकने और नौकरी से हटाने की धमकी दी जाती थी, जिससे वे मानसिक दबाव में काम करने को मजबूर थीं। जांच में देरी से नाराज समूह सखियों का कहना है कि यदि जल्द ही निष्पक्ष जांच और कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगी। उनका कहना है कि सरकार की योजनाएं जमीन पर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही हैं। इस दौरान श्यामा, स्वेता, सुनीता, सुनीता देवी, गुड़िया, दीपा कुमारी, दुर्गादेवी, सीता, मौसमी, वर्तिका देवी, मीरा, प्रेमलता, राजकुमारी सहित अन्य महिलाएं मौजूद रही।
