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नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को प्रतिभा पाटिल का समर्थन, PM मोदी को लिखा पत्र


महिला आरक्षण कानून यानी ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर देश में जारी बहस के बीच पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने इसका खुलकर समर्थन किया है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस पहल की सराहना की है. इस पत्र को राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब विपक्ष इस कानून के विभिन्न पहलुओं पर सवाल उठा रहा है.

11 अप्रैल को पुणे स्थित अपने आवास ‘रायगढ़’ से लिखे गए पत्र में प्रतिभा पाटिल ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को भारतीय लोकतंत्र के लिए एक ‘परिवर्तनकारी कदम’ करार दिया. उन्होंने इस कानून के ऐतिहासिक क्रियान्वयन के लिए अपनी हार्दिक सराहना व्यक्त की.

उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि यह संवैधानिक संशोधन विधायी निकायों में महिलाओं की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करेगा, जिससे भारत का लोकतांत्रिक ढांचा और मजबूत होगा. देश की पहली महिला राष्ट्रपति होने के नाते उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वास्तविक महिला सशक्तिकरण तभी संभव है, जब महिलाओं को उन निर्णयों में समान अवसर मिले जो राष्ट्र को प्रभावित करते हैं.

प्रतिभा पाटिल ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक कानूनी प्रावधान नहीं है, बल्कि लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और एक प्रगतिशील भारत के निर्माण का सामूहिक संकल्प है. उन्होंने कहा कि संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से विधायी बहसों में विविधता आएगी और नीतियां अधिक संतुलित और संवेदनशील बनेंगी. पूर्व राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि यह पहल खासकर ग्रामीण और हाशिए के समुदायों से आने वाली महिलाओं को प्रेरित करेगी और उन्हें राष्ट्र निर्माण में नेतृत्व करने का अवसर देगी.

प्रतिभा पाटिल की राजनीतिक पृष्ठभूमि कांग्रेस से जुड़ी रही है और वे यूपीए सरकार के दौरान राष्ट्रपति बनी थीं. ऐसे में उनका यह समर्थन खास मायने रखता है, क्योंकि कांग्रेस इस कानून की समय-सीमा, परिसीमन और ओबीसी आरक्षण जैसे मुद्दों को लेकर लगातार सवाल उठा रही है. ऐसे में उनकी ओर से प्रधानमंत्री मोदी को लिखा गया यह पत्र सरकार के लिए एक नैतिक समर्थन के रूप में देखा जा रहा है. पत्र के अंत में उन्होंने इस लंबे समय से लंबित सपने को साकार करने वाले सभी नेताओं और हितधारकों की सराहना भी की. महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को लेकर संसद के विशेष सत्र से पहले सरकार और विपक्ष के बीच टकराव तेज हो गया है. कांग्रेस ने इस कानून की मंशा पर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा ने विपक्ष पर अतीत में महिलाओं की अनदेखी का आरोप लगाया है.

देश की महिलाओं के नाम लिखे अपने पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अगर 2029 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव पूरी तरह महिला आरक्षण लागू होने के साथ कराए जाते हैं, तो भारतीय लोकतंत्र और अधिक मजबूत और जीवंत होगा. उन्होंने कहा कि महिलाओं की नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को और मजबूती देगी.

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