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I-PAC मनी लॉन्ड्रिंग केस में बड़ा खुलासा, ED का दावा 50% चेक और बाकी कैश


दिल्ली में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पॉलिटिकल कंसल्टेंसी कंपनी I-PAC से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ा एक्शन लेते हुए कंपनी के डायरेक्टर और फाउंडर वीनेश चंदेल को सोमवार शाम करीब 7:45 बजे गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग कानून PMLA के तहत की गई है। ईडी ने अपनी जांच दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज उस FIR के आधार पर शुरू की थी, जिसमें धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, फर्जी अकाउंटिंग और खातों में गड़बड़ी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

ईडी के मुताबिक, I-PAC अपने डायरेक्टर्स वीनेश चंदेल, ऋषि राज सिंह और अन्य लोगों के जरिए एक संगठित तरीके से अवैध कमाई (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) को पैदा करने, छिपाने और उसे वैध दिखाने के काम में लगी हुई थी। एजेंसी का कहना है कि कंपनी ने फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन्स का ऐसा जाल बनाया था, जिससे काले धन को सफेद दिखाया जा सके।

जांच में यह भी सामने आया है कि वीनेश चंदेल कंपनी के फाउंडर होने के साथ-साथ सभी अहम फैसलों का केंद्र था और वही कंपनी के फाइनेंशियल और ऑपरेशनल मामलों को कंट्रोल करता था। ईडी का दावा है कि चंदेल खुद इस पूरी प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल था और अवैध कमाई को सिस्टम के जरिए घुमाने में उसकी सीधी भूमिका थी।

सबसे बड़ा खुलासा ईडी ने कंपनी के काम करने के तरीके यानी मोडस ऑपरेंडी को लेकर किया है। एजेंसी के अनुसार, I-PAC पैसे को दो हिस्सों में बांटकर लेती थी ,एक हिस्सा बैंकिंग चैनल (चेक/ऑनलाइन) के जरिए और दूसरा हिस्सा कैश या गैर-बैंकिंग चैनल के जरिए।

ईडी को मिले दस्तावेजों में 50% चेक जैसी एंट्री मिली है, जिससे यह संकेत मिलता है कि आधा पैसा ऑफिशियल तरीके से लिया जाता था और बाकी कैश में, ताकि उसे रिकॉर्ड में न दिखाया जाए। इसमें राजनीतिक पार्टियों से मिले फंड भी शामिल होने का दावा किया गया है। ईडी का आरोप है कि I-PAC ने कई फर्जी बिल (बोगस इनवॉइस) बनाए, ताकि अलग-अलग कंपनियों से मिले पैसों को सही ठहराया जा सके, जबकि असल में कोई सर्विस या कंसल्टेंसी दी ही नहीं गई थी। इन फर्जी ट्रांजैक्शन्स के जरिए अवैध पैसे को पहले अलग-अलग लेयर्स में घुमाया गया और फिर उसे वैध कमाई के रूप में सिस्टम में शामिल कर दिया गया।

जांच एजेंसी ने कोर्ट में बताया कि कंपनी के खातों में कई ऐसी एंट्रियां मिली हैं, जिनका कोई असली बिजनेस मकसद नहीं था। इससे यह साफ होता है कि I-PAC एक कंड्यूट यानी पैसे को इधर-उधर घुमाने का माध्यम बनकर काम कर रही थी। ईडी का कहना है कि इस पूरे खेल में हवाला नेटवर्क का भी इस्तेमाल हुआ, जहां कैश को गैर-कानूनी चैनलों के जरिए ट्रांसफर किया गया।

PMLA के तहत दर्ज बयानों में यह भी सामने आया है कि I-PAC से जुड़े कुछ लोग हवाला ट्रांजैक्शन कराने में मदद कर रहे थे। इससे यह साबित होता है कि कंपनी ने जानबूझकर दोहरी व्यवस्था बनाई थी। एक तरफ बैंकिंग सिस्टम और दूसरी तरफ अनऑफिशियल चैनल,ताकि पैसों के असली सोर्स को छुपाया जा सके और उसे वैध बिजनेस इनकम की तरह दिखाया जा सके।

ईडी ने वीनेश चंदेल पर यह भी आरोप लगाया है कि उन्होंने पूछताछ के दौरान झूठे और भ्रामक बयान दिए। उन्होंने कैश ट्रांजैक्शन्स के अस्तित्व से इनकार किया और कंपनी के कामकाज को गलत तरीके से पेश किया। इतना ही नहीं, एजेंसी का दावा है कि चंदेल और अन्य डायरेक्टर्स ने मिलकर कंपनी के कर्मचारियों के अकाउंट्स से अहम ईमेल और फाइनेंशियल डेटा भी डिलीट करवाया, ताकि सबूत मिटाए जा सकें।

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