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फैटी लिवर को हल्के में न लें, धीरे-धीरे बढ़ता है लिवर सिरोसिस का खतरा


भारत में तेजी से फैटी लिवर की बीमारी बढ़ रही है। ये लिवर में खराबी का पहले संकेत, पहला लक्षण या कहें पहला स्टेज है। अगर इसे हल्के में लिया तो स्थिति खतरनाक हो सकती है। फैटी लिवर लंबे समय में ध्यान न देने पर कब लिवर सिरोसिस में बदल जाएगा आपको पता भी नहीं चलेगा। हालांकि ऐसा एक दिन में नहीं होता कि आपको फैटी लिवर हुआ और लिवर सिरोसिस हो गया। फैटी लिवर से लिवर सिरोसिस होने में 15-25 साल का समय लग सकता है, अगर आप नॉर्मल डाइट लेते हैं और फैटी लिवर के लिए दवाएं खाते हैं तो इसके खतरे से बचा जा सकता है।

लंबे समय में लिवर में फैट जमा होने, सूजन आने और घाव बनने की प्रक्रिया होती है। जब फैटी लिवर के कारण लगातार सूजन रहती है, तो हेल्दी कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं और उनकी जगह सख्त ऊतक यानि स्कार टिशूज ले लेते हैं। इससे लिवर का काम करना बंद होने लगता है इस स्थिति को लिवर सिरोसिस कहते हैं।

शुरुआत में फैटी लिवर होता है और धीरे-धीरे लिवर कोशिकाओं में अतिरिक्त फैट जमा होने लगता है। इसका कोई बड़ा दिखाई देने वाला लक्षण शुरुआत में नहीं दिखता। अगर फैट जमा रहता है तो यह लिवर में सूजन पैदा करता है। इससे लिवर सेल्स को नुकसान होता है। इससे लिवर में घाव या निशान पड़ जाते हैं। इसे लिवर फाइब्रोसिस कहते हैं। लंबे समय में ये निशान बढ़ जाते हैं और पूरा लिवर सख्त और डैमेज होने लगता है। ये लास्ट स्टेज होती है इसके बाद सिर्फ लिवर ट्रांसप्लांट का ही विकल्प बचता है।

अगर आपको फैटी लिवर है। इसके साथ मोटापा और डायबिटीज है तो लिवर सिरोसिस का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। अनहेल्दी लाइफस्टाइल जैसे खाने-पीने में लापरवाही, फिजिकल एक्टिविटी कम होना, हाई कोलेस्ट्रॉल लिवर सिरोसिस के खतरे को बढ़ाता है। हालांकि फैटी लिवर होने पर जरूरी नहीं है कि सभी को लिवर सिरोसिस हो, लेकिन इसके लिए सही इलाज और लाइफस्टाइल में बदलाव करना सबसे जरूरी है। तभी आप लिवर सिरोसिस से बच सकते हैं।

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