आगरा। आज के समय में शिक्षक की भूमिका केवल कक्षा तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि वह समाज के निर्माण में एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभरकर सामने आ रहा है। शिक्षक न केवल बच्चों को शिक्षा देते हैं, बल्कि उनके व्यक्तित्व, संस्कार और सोच को भी आकार देते हैं।
शिक्षक जब अपने घर से बाहर निकलता है, तो वह केवल एक सामान्य व्यक्ति नहीं रहता, बल्कि समाज की नजरों में वह आदर्श और प्रेरणा का प्रतीक बन जाता है। बाजार, गलियों या सार्वजनिक स्थानों पर जब कोई बच्चा गर्व से कहता हैकृ“ये हमारी मैम हैं” या “ये हमारे सर हैं”, तो यह शिक्षक के प्रति बच्चों के सम्मान और जुड़ाव को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चे अपने शिक्षकों को हर समय देखते और उनसे सीखते हैं। वे केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि शिक्षक के व्यवहार, बोलचाल और छोटे-छोटे कार्यों को भी अपनाने का प्रयास करते हैं। ऐसे में शिक्षक का हर शब्द और हर कदम बच्चों के भविष्य को प्रभावित करता है।
शिक्षक को एक दीपक के समान बताया गया है, जो स्वयं जलकर दूसरों के जीवन में रोशनी फैलाता है। यही कारण है कि इस पेशे के साथ एक बड़ी जिम्मेदारी जुड़ी होती है, जिसे हर शिक्षक को समझते हुए निभाना चाहिए।
समाज के प्रबुद्ध वर्ग ने सभी शिक्षकों से आह्वान किया है कि वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ करें तथा बच्चों के लिए एक ऐसा आदर्श प्रस्तुत करें, जिस पर उन्हें जीवन भर गर्व हो सके।
