हाथरस। नारी सशक्तिकरण किसी भी विकसित और समतामूलक समाज की मूलभूत आवश्यकता है। इसी विचार को साकार रूप देने हेतु भारत सरकार द्वारा वर्ष 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक ऐतिहासिक एवं दूरगामी प्रभाव वाला निर्णय सिद्ध हुआ है। यह केवल एक विधिक प्रावधान नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी को राष्ट्रनिर्माण की मुख्यधारा में सशक्त रूप से स्थापित करने का संकल्प है।
इस अधिनियम के अंतर्गत लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है। यह कदम महिलाओं को केवल मतदाता तक सीमित न रखते हुए उन्हें नीति-निर्माता के रूप में स्थापित करने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्षों से लंबित इस विषय को अब निर्णायक रूप मिला है, जो भारतीय लोकतंत्र को और अधिक समावेशी बनाएगा।
इस अधिनियम को प्रभावी रूप से लागू करने के उद्देश्य से 16 से 18 अप्रैल 2026 तक संसद का विशेष सत्र आयोजित किया जा रहा है। यह सत्र 128वें संवैधानिक संशोधन को धरातल पर उतारने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगा। विशेष रूप से वर्ष 2029 के आम चुनाव से पूर्व महिलाओं को आरक्षण का वास्तविक लाभ प्रदान करना इसका प्रमुख लक्ष्य है, जिससे उनकी राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
यह अधिनियम महिलाओं के लिए अनेक नए अवसरों के द्वार खोलता है। अब महिलाएं केवल घरेलू दायित्वों तक सीमित न रहकर शासन और प्रशासन में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकेंगी। इससे न केवल उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि समाज में उनकी स्थिति और अधिक सुदृढ़ होगी। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों की महिलाएं अपनी समस्याओं को सीधे शासन तक पहुँचा सकेंगी और उनके समाधान में सहभागी बन सकेंगी।
परंतु यह भी उतना ही सत्य है कि किसी भी कानून की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन और जन-जागरूकता पर निर्भर करती है। अतः यह उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग का यह संकल्प है व हम सभी का सामूहिक दायित्व है कि इस अधिनियम की जानकारी जन-जन तक पहुँचाई जाए। प्रत्येक गांव, प्रत्येक नगर और प्रत्येक परिवार तक इस संदेश को पहुँचाना आवश्यक है, ताकि महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति सजग एवं जागरूक बन सकें।
जन-जागरूकता अभियानों, संगोष्ठियों, बैठकों एवं शिविरों के माध्यम से इस अधिनियम के महत्व को व्यापक रूप से प्रसारित किया जाना चाहिए। जब तक समाज की प्रत्येक महिला इस अधिकार से परिचित नहीं होगी, तब तक इसका पूर्ण लाभ प्राप्त नहीं किया जा सकेगा।
महिलाओं को भी चाहिए कि वे इस अवसर का पूर्णतः लाभ उठाएँ, आगे आएँ, अपने अधिकारों को समझें और नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए स्वयं को तैयार करें। परिवार और समाज का भी यह दायित्व है कि वे महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें और उनका सहयोग करें।
अंततः, नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि एक सशक्त, समतामूलक और प्रगतिशील भारत के निर्माण की आधारशिला है। यदि हम सभी मिलकर इसके उद्देश्यों को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास करें, तो वह दिन दूर नहीं जब देश की प्रत्येक महिला सशक्त, आत्मनिर्भर और निर्णय लेने में सहभागी होगी। यही सच्चे अर्थों में नारी सम्मान और राष्ट्र उन्नति का मार्ग है।
