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लखनऊ: 82 प्रतिसत से अधिक लोग मल में खून को कोलोरेक्टल कैंसर के चेतावनी संकेत के रूप में पहचानने में असफलरू सर्वेक्षण


लखनऊ। भारत में तेज जीवनशैली, अस्वास्थ्यकर खान-पान और बैठकर काम करने की आदतों के कारण पाचन संबंधी समस्याएं तेजी सेबढ़ रही हैं। पाचन संबंधी समस्याओं की बढ़ती व्यापकता के बावजूद, कोलोरेक्टल कैंसर जैसे गंभीर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोगों के बारे में जागरूकता अभी भी कम है।यह समझने के लिए कि लोग पाचन संबंधी लक्षणों को कैसे समझते हैं और कब चिकित्सा सहायता लेते हैं, मर्क स्पेशालिटीज प्रां.लि.के सहायता से लाइफस्टाइल एवं डाइजेस्टिव हेल्थ अवेयरनेस सर्वे के माध्यम से एक राष्ट्रीय स्तर का परसेप्शन ऑडिट समर्थित किया। इस सर्वेक्षण में यह आकलन किया गया कि लोग अनियमित मल त्याग, एसिडिटी और मल में खून जैसे लक्षणों पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं, साथ ही जागरूकता की कमी और व्यवहारिक पैटर्न की पहचान की गई, जो समय पर चिकित्सा परामर्श और निदान में देरी का कारण बन सकतेहैं।इन निष्कर्षों को एक लखनऊ प्रेस क्लब में आयोजित कॉन्फ्रेंस में साझा किया गया, जिसमें डॉ. अभिषेक पाठक, सीनियर कंसल्टेंट - मेडिकल ऑन्कोलॉजी, अपोलो मेडिक्स हॉस्पिटल, लखनऊय डॉ. अभिषेक कुमार सिंह, डायरेक्टर - मेडिकल ऑन्कोलॉजी, मेदांता हॉस्पिटल, लखनऊय और डॉ. सौरभ मिश्रा, डायरेक्टर - सिनर्जी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, लखनऊध्गोरखपुर शामिल थे। सभी विशेषज्ञों ने पाचन स्वास्थ्य के लक्षणों के लिए अधिक जागरूकता और समय पर चिकित्सा परामर्श की आवश्यकता पर जोर दिया।

कोलोरेक्टल कैंसर भारत में एक बढ़ती स्वास्थ्य चिंता के रूप में उभर रहा है, जिसका कारण अस्वास्थ्यकर खान-पान, मोटापा और आंत स्वास्थ्य के प्रति कम जागरूकता है। हालांकि शुरुआती अवस्था में इसका पता लगने पर यह काफी हद तक रोके जाने योग्य और उपचार योग्य है, लेकिन देर से स्क्रीनिंग और लक्षणों के प्रति कम जागरूकता के कारण कई मामलों का निदान देरसे होता है। इस पृष्ठभूमि में, राष्ट्रीय सर्वेक्षण ने पाचन स्वास्थ्य जागरूकता और जीवनशैली से जुड़े चिंताजनक रुझानों को उजागर किया।इस राष्ट्रीय सर्वेक्षण में 25 से 65 वर्ष आयु वर्ग के 10,198 लोगों की प्रतिक्रियाएं शामिल की गईं, जो 14 प्रमुख भारतीय शहरोंकृकोलकाता, अहमदाबाद, बैंगलोर, कालीकट, चंडीगढ़, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, इंदौर, जयपुर, कोच्चि, लखनऊ, मुंबई और पुणेकृसे ली गईं। निष्कर्षों में पाचन स्वास्थ्य व्यवहार और जागरूकता में कई चिंताजनक पैटर्न सामने आए। 80ः से अधिक लोग एसिडिटी, अपच या कब्ज जैसी समस्याओं के लिए डॉक्टर से सलाह लेने के बजाय स्वयं-उपचार करते हैं। 65ः से अधिक लोगों ने अनियमित मल त्याग का अनुभव होने की बात कही। 50ः से अधिक लोग सप्ताह में कम से कम तीन बार बाहर का या पैकेज्ड भोजन करते हैं, जबकि28.1ः लगभग रोजबाहर खाना खाते हैं। केवल 45.2ः लोग नियमित व्यायाम करते हैं, जबकि 54.8ः लोग सप्ताह में तीन बार भी व्यायाम नहीं करते। 39.9ः लोगों ने तंबाकू सेवन की बात स्वीकार की, जो गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोगों का एक ज्ञात जोखिम कारक है। 40ः युवा उत्तरदाताओं ने लक्षणों को नजरअंदाज किया और पाचन संबंधी समस्याओं के बावजूद डॉक्टर से सलाह नहीं ली, यह मानते हुए कि यह जीवनशैली के कारण है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 80ः से अधिक लोग यह नहीं जानते कि मल में खून कोलोरेक्टल कैंसर का प्रारंभिक चेतावनी संकेत हो सकता है।डॉ. अभिषेक पाठक, सीनियरकंसल्टेंट - मेडिकल ऑन्कोलॉजी, अपोलो मेडिक्स हॉस्पिटल, लखनऊ, ने कहा,“कोलोरेक्टल कैंसर कोलन या रेक्टममें विकसित होता है और अक्सर छोटे वृद्धि (पॉलीप्स) के रूप मेंशुरू होता है, जो बिना उपचार के धीरे-धीरे कैंसर में बदल सकताहै। जोखिम कारकोंमें कम फाइबर वाला आहार, मोटापा, निष्क्रिय जीवनशैली, तंबाकू सेवन और उम्रशामिलहैं। लगातार मल त्याग में बदलाव, मल में खून, पेट मेंअसहजता, थकान या बिना कारण वजन कम होना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें। कोलोरेक्टल कैंसर का प्रारंभिक अवस्था में कोलोनोस्कोपी जैसी जांचों से पता लगाकर प्रभावी उपचार संभव है।डॉ. अभिषेक कुमार सिंह, डायरेक्टर - मेडिकल ऑन्कोलॉजी, मेदांता हॉस्पिटल, लखनऊ, ने कहा कि लखनऊ के सर्वेक्षण के निष्कर्ष स्वयं-उपचार और कोलोरेक्टल कैंसर के प्रति कम जागरूकता कोलेकर गंभीर चिंता दर्शातेहैं। अधिकांश लोग चिकित्सा सलाहलेने के बजाय घरेलू उपायों या ओवर-द-काउंटरदवाओं पर निर्भर रहतेहैं, जिससे मूल बीमारीछिप जाती है और निदान मेंदेरी होती है। इससेभी अधिक चिंताजनक यहहै कि कईलोग मल में खून कोकोलोरेक्टलकैंसर का प्रमुख चेतावनी संकेत नहीं मानते, जिसके कारण बीमारी का पता उन्नत अवस्था में चलता है। अनियमित मल त्याग जैसी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि समय पर जांच और चिकित्सा परामर्श से शुरुआती अवस्था मेंपहचान, बेहतर जीवित रहने की संभावना और बेहतर परिणाम सुनिश्चित किए जा सकतेहैं।डॉ. सौरभ मिश्रा, डायरेक्टर - सिनर्जी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, लखनऊध्गोरखपुर, ने कहा कि जीवनशैली की आदतें कोलोरेक्टल कैंसर के बढ़ते मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभातीहैं। उन्होंने कहा,“प्रोसेस्ड या बाहर के भोजन का अधिक सेवन, शारीरिक गतिविधि की कमी, तंबाकू का उपयोग और मोटापा जोखिम को बढ़ा सकते हैं। फाइबर युक्त आहार अपनाना, नियमित व्यायाम करना, तंबाकू सेबचना और नियमित जांच कराना कोलोरेक्टल कैंसर के जोखिम को कम करने और समग्र पाचनस्वास्थ्यमें सुधार करनेमेंमदद कर सकताहै।”

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