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पाकिस्तान के एक अस्पताल में कई बार सिरिंज इस्तेमाल करने से 300 से ज्यादा बच्चे हुए एचआईवी पॉजिटिव


पाकिस्तान के एक अस्पताल में सिरिंज के बार-बार उपयोग से 331 बच्चों में एचआईवी संक्रमण होने की सनसनीखेज खबर सामने आई है। एक तस्वीर में अस्पताल के स्टाफ द्वारा मल्टी-डोज वायल्स पर सिरिंज का पुन: उपयोग करने और बिना स्टेराइल दस्तानों के मरीजों को इंजेक्शन लगाने की घटना कैद हुई है। इसके बाद जांच में बच्चों की एचआईवी रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई है। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कई संक्रमण असुरक्षित इंजेक्शन प्रैक्टिस से जुड़े हो सकते हैं।

न्यूज़ की एक गुप्त जांच ने पाकिस्तान के टीएचक्यू अस्पताल टौन्सा में संक्रमण नियंत्रण की गंभीर विफलताओं को उजागर किया है, जहां स्टाफ को बच्चों पर सिरिंज का पुन: उपयोग करते हुए दिखाया गया है। फुटेज में स्वच्छता मानकों का भी गंभीर उल्लंघन किए जाने और एक ही उपकरण (सिरिंज) का कई मरीजों पर पुन: उपयोग दिखाया गया, जो असुरक्षित चिकित्सा प्रथाओं से जुड़े एचआईवी संक्रमण का कारण बन रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एचआईवी संक्रमण के चलते आठ वर्षीय एक बच्चे की दर्दनाक मौत हो गई। इसकी रिपोर्ट कुछ दिनों पहले ही पॉजिटिव पाई गई थी। बच्चे की माँ ने बताया कि मौत से पहले उसके आखिरी दिनों में बच्चे को तेज बुखार और तेज दर्द की पीड़ा झेलनी पड़ रही थी। कुछ समय बाद उस बच्चे की बहन भी एचआईवी पॉजिटिव पाई गई। परिवार का मानना है कि दोनों बच्चे सरकारी अस्पताल में रूटीन इलाज के दौरान दिए गए दूषित इंजेक्शन से वायरस की चपेट में आए। यह प्रकोप सबसे पहले दिसंबर 2024 के अंत में स्थानीय चिकित्सक डॉ. गुल कैसरानी के ध्यान में आया, जब उन्होंने अपने क्लिनिक आने वाले बच्चों में एचआईवी मामलों में असामान्य वृद्धि देखी।

बीबीसी की जांच में नवंबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच टौन्सा में कम से कम 331 बच्चों के एचआईवी पॉजिटिव पाए जाने की पुष्टि हुई। सबूतों से पता चलता है कि इनमें से कई संक्रमण असुरक्षित इंजेक्शन प्रथाओं से जुड़े हो सकते हैं। कई मामलों में एक ही वायल का इस्तेमाल अलग-अलग बच्चों के इलाज के लिए किया गया। इसमें भले ही उन्होंने नई सुई लगा दी हो, लेकिन पीछे का हिस्सा, जिसे हम सिरिंज बॉडी कहते हैं, उसमें वायरस हो सकता है। इसलिए नई सुई के साथ भी यह संक्रमण फैला सकता है। पाकिस्तान के प्रमुख संक्रामक रोग विशेषज्ञों में से एक और सलाहकार व माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. अल्ताफ अहमद ने कहा कि इस चिंताजनक घटना में विशेष रूप से एक नर्स को इस्तेमाल किए गए सिरिंज में बचा हुआ तरल पदार्थ निकालते और उसे अपने सहयोगी को देते देखा गया, जो स्पष्ट रूप से पुन: उपयोग के लिए था। अहमद ने कहा, वह इंजेक्शन दवा देने के हर सिद्धांत का उल्लंघन कर रही है।

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