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रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे 26 भारतीयों की वापसी पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस! परिवार ने लगाया जबरन सेना में भर्ती किए जाने का आरोप


रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में फंसे भारतीय नागरिकों की स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है. कोर्ट ने 26 भारतीय नागरिकों के परिवार वालों की तरफ से दाखिल याचिका पर केंद्र सरकार से एक सप्ताह में जवाब मांगा है. याचिका में कहा गया है कि इन लोगों को रूस में बंधक बनाकर जबरन युद्ध लड़ने के लिए मजबूर किया गया है.

शुक्रवार, 10 अप्रैल को मामला चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच में सुनवाई के लिए लगा. याचिकाकर्ता पक्ष के वकीलों ने आरोप लगाया कि भारतीय नागरिक एक विदेशी राष्ट्र के लिए अनचाही जंग लड़ने को मजबूर हैं. लेकिन सरकार इस बारे में निष्क्रिय बनी हुई है.

जजों ने स्थिति पर चिंता जताई. उन्होंने सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वह एक सप्ताह के भीतर केंद्र सरकार से जरूरी निर्देश लें और रिपोर्ट दाखिल करें. तुषार मेहता ने इस पर सहमति जताई. याचिका में केंद्र सरकार के साथ राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और पंजाब की सरकारों और भारत में रूसी दूतावास को भी पक्ष बनाया गया है.

याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि उनके परिवार के सदस्य टूरिस्ट, स्टूडेंट या दूसरे वैध वीजा पर रूस गए थे. नौकरी के लिए भर्ती करने वाले एजेंटों ने उन्हें अच्छा रोजगार देने का वादा किया था. लेकिन वहां पहुंचने के बाद एजेंटों ने उनके पासपोर्ट और पहचान पत्र जब्त कर लिए. उन पर दबाव डाल कर जबरन रूसी सेना में शामिल कर लिया.

याचिका में बताया गया है कि पिछले साल सितंबर-अक्टूबर के बाद से कई परिवारों का अपने सदस्यों से संपर्क पूरी तरह टूट चुका है. इन लोगों से अंतिम बार हुए संपर्क के आधार पर बताया गया है कि वह कुपयांस्क, सेलिदोव, मकीवका और चेल्याबिंस्क जैसे युद्ध क्षेत्रों में हो सकते हैं. याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि वियना कन्वेंशन के तहत दूसरे देश में रह रहे लोगों को कूटनीतिक पहुंच, सहायता और सुरक्षा का अधिकार होता है. लेकिन उन्हें इससे वंचित रखा गया है.

याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट भारत सरकार को राजनयिक हस्तक्षेप करने का निर्देश दे. एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए जो परिवारों के साथ बात करे और उन्हें जरूरी जानकारी दे. सरकार रूस में फंसे भारतीयों की स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करे. भारत में चल रहे अवैध भर्ती नेटवर्क और एजेंटों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो.

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