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लाडकी बहीण योजना: अपात्र ‘बहनों’ पर सरकार के 21 हजार करोड़ खर्च


महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण’ योजना में बड़ा खुलासा हुआ है। मार्च 2026 तक पूरी हुई सत्यापन प्रक्रिया में करीब 71 लाख महिलाएं अपात्र पाई गई हैं। इसके बावजूद इन महिलाओं को पिछले 20 महीनों से हर महीने 1500 रुपये का अनुदान दिया जाता रहा। जानकारी के अनुसार, नवंबर 2024 से इन अपात्र लाभार्थियों को हर महीने करीब 1,065 करोड़ रुपये वितरित किए गए। इस तरह अब तक सरकार पर करीब 21,300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा है।

महायुति सरकार ने जुलाई 2024 में यह योजना शुरू की थी। योजना के तहत आवेदन करने वाली हर महिला को 1500 रुपये प्रतिमाह देने का निर्णय लिया गया। अंतिम दिन तक 2 करोड़ 47 लाख आवेदन प्राप्त हुए। सभी को पात्र मानते हुए सीधे खातों में राशि ट्रांसफर की गई। इस योजना पर सरकार को हर महीने करीब 3,600 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ रहे थे।

सरकार ने वित्तीय दबाव बढ़ने के बाद नवंबर 2024 से धीरे-धीरे लाभार्थियों की जांच शुरू की। 1.90 करोड़ महिलाओं ने ई-केवाईसी पूरी की। इनमें से 1.75 करोड़ महिलाएं पात्र पाई गईं। जबकि 71 लाख महिलाएं अपात्र घोषित हुईं। इससे साफ हुआ कि बड़ी संख्या में लोगों ने योजना का गैर-फायदा उठाया।

राज्य के कई हिस्सों में असमय बारिश और ओलावृष्टि के कारण केवाईसी प्रक्रिया प्रभावित हुई। महिला एवं बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे ने जानकारी दी कि लाभार्थियों को 30 अप्रैल 2026 तक केवाईसी पूरा करने की मोहलत दी गई है। शेष महिलाएं ई-प्रणाली के माध्यम से अपने दस्तावेज जमा करें।

अपात्र घोषित की जा चुकी महिलाओं को 20 महीनों तक अनुदान मिलने से अब कई सवाल उठ रहे हैं। सवाल है इस 21 हजार करोड़ रुपये की जिम्मेदारी कौन लेगा।

सूत्रों के अनुसार, इस योजना के लिए सरकार को अन्य विभागों, विशेषकर आदिवासी और सामाजिक न्याय विभाग के फंड को भी डायवर्ट करना पड़ा है। ‘लाडकी बहीण’ योजना जहां एक ओर महिलाओं को आर्थिक सहारा देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी, वहीं अब इसमें सामने आई अनियमितताओं ने सरकार की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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