हुमायूं कबीर ने ओवैसी को बताया बड़ा भाई, ममता को लगेगा जोर का झटका
March 25, 2026
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है. इसी बीच हुमायूं कबीर और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने अपने गठबंधन का ऐलान कर दिया है, जिसने राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है. यह गठबंधन सीधे तौर पर ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) को चुनौती देने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. खासतौर पर माना जा रहा है कि इसका असर मुस्लिम वोट बैंक पर पड़ सकता है, जो अब तक बड़ी संख्या में TMC के साथ रहा है. ओवैसी के प्रति गहरी प्रशंसा व्यक्त करते हुए, कबीर ने उन्हें अपना 'बड़ा भाई' बताया और उस रणनीतिक साझेदारी पर जोर दिया जो उनके चुनावी अभियान का मार्गदर्शन करेगी. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कबीर ने कहा, 'मैं इस गठबंधन में उन्हें (ओवैसी को) अपना बड़ा भाई मानते हुए और इन चुनावों में उनके सुझावों का पालन करते हुए शामिल हुआ हूं.'
सियासी विश्लेषकों की मानें तो अगर AIMIM और उसके सहयोगी दल मुस्लिम मतदाताओं को अपने पक्ष में खींचने में सफल होते हैं, तो इससे TMC के वोट शेयर में सेंध लग सकती है और मौजूदा सत्ताधारी पार्टी की मुखिया ममता बनर्जी को इस बात से बड़ा झटका लगेगा. हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि यह गठबंधन जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव डाल पाता है और चुनावी नतीजों पर इसका कितना असर पड़ता है. कुल मिलाकर, इस नए गठबंधन ने पश्चिम बंगाल के चुनावी मुकाबले को और अधिक दिलचस्प और बहुकोणीय बना दिया है. अब नजर इस बात पर होगी कि मतदाता किस दिशा में रुख करते हैं.
जनता उन्नयन पार्टी (JUP) के संस्थापक हुमायू कबीर ने बुधवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के साथ अपने राजनीतिक गठबंधन की मजबूती को फिर से दोहराया. कबीर की टिप्पणियों ने उस एकता और सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया को रेखांकित किया जो उनकी चुनावी रणनीतियों को नया आकार देगी. उन्होंने आगे कहा, 'मेरे उम्मीदवार कौन हैं, हम किन सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं, और वे (AIMIM) किन सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं यह फैसला मैंने कल रात ही कर लिया था. कल रात मेरे बड़े भाई के साथ परामर्श करके जो फैसला लिया गया, वही चुनावी मैदान में हमारा अंतिम निर्णय होगा. हम मिलकर लड़ेंगे.'
कबीर ने संयुक्त चुनावी अभियान के कार्यक्रम का भी विस्तृत विवरण दिया, जिसमें पूरे पश्चिम बंगाल में 20 रैलियों की एक सीरीज शामिल है. पहली रैली 1 अप्रैल को बहरामपुर में आयोजित की जाएगी, जहां कबीर और ओवैसी दोनों ही विशाल जनसमूह को संबोधित करेंगे. कबीर ने रैलियों में ओवैसी की भागीदारी के लिए अपनी उत्सुकता व्यक्त करते हुए कहा, 'मैंने अपने बड़े भाई से यह अपील की है कि चूंकि पश्चिम बंगाल के चुनाव इन दो चरणों में होने वाले हैं, इसलिए उन्हें मेरे साथ कम से कम 20 रैलियों में शामिल होना चाहिए.' ये रैलियां प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों में आयोजित करने की योजना है, जिनमें मुर्शिदाबाद, उत्तर बंगाल, मालदा, बीरभूम, उत्तर दिनाजपुर, आसनसोल और अंत में कोलकाता शामिल हैं.
पश्चिम बंगाल में जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, कबीर ने चुनाव प्रचार के हर पहलू में ओवैसी के दिखाए रास्ते पर चलने की अपनी प्रतिबद्धता पर ज़ोर दिया. वहीं असदुद्दीन ओवैसी ने भी पूरे मजबूती के साथ इस साझेदारी के प्रति अपने इस गठबंधन के जरिए प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा, 'मेरा भाई जो भी फैसला लेगा और जो भी निर्देश देगा, आने वाले दिनों में मैं उसका पालन करूंगा. यह गठबंधन कभी नहीं टूटेगा.' कबीर ने यह भी साफ किया कि यह गठबंधन सिर्फ 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए नहीं है, बल्कि भविष्य के चुनावों में भी तब तक जारी रहेगा, जब तक मैं जिंदा हूं और सियासत में हूं.
AIMIM के अध्यक्ष ओवैसी ने रविवार को घोषणा की कि पार्टी आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव हुमायूं कबीर की 'आम जनता उन्नयन पार्टी' के साथ गठबंधन में लड़ेगी. हुमायूं कबीर ने कहा कि उनकी पार्टी आगामी 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में 182 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जिनमें से वे लगभग आठ सीटें AIMIM को देंगे. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव दो चरणों में, 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होंगे, और वोटों की गिनती 4 मई को होगी.
