जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता शब्बीर शाह को टेरर फंडिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत
March 12, 2026
जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता शब्बीर शाह को टेरर फंडिंग से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है. गुरुवार (12 मार्च, 2026) को कोर्ट ने निचली अदालत में मुकदमे की सुनवाई में हो रही देरी के चलते शब्बीर शाह को राहत दी है. शब्बीर शाह को जून 2019 में गिरफ्तार किया गया था. उन पर हवाला के जरिए सीमा पार से पैसे हासिल करने का आरोप है.
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार शब्बीर शाह जम्मू कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी के मुखिया हैं. उन पर घाटी में पत्थरबाजी जैसे हिंसक प्रदर्शन करवाने के भी आरोप हैं. नेशनल इन्वेटिगेशन एजेंसी (NIA) ने अनलॉफुल एक्टिविटीज (प्रीवेंशन) एक्ट (UAPA) के तहत उनके खिलाफ मामला दर्ज किया था.
शब्बीर शाह की तरफ से सीनियर एडवोकेट कॉलिन गोंजाल्विस ने कहा कि आरोपी के खिलाफ सबूतों के अभाव और कारावास की लंबी अवधि को देखते हुए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में 400 गवाहों के बयान लिए जाने हैं, जिसमें लंबा समय लग सकता है.
सुप्रीम कोर्ट से पहले शब्बीर शाह ने स्पेशल कोर्ट से उनकी जमानत याचिका खारिज होने को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. हालांकि, हाईकोर्ट में भी उनकी याचिका खारिज हो गई. इसके बाद उन्होंने सप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने उन्हें जमानत दे दी.
दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शैलेंद्र कौर की बेंच ने कहा था कि प्रथम दृष्टया शब्बीर शाह के खिलाफ लगे आरोप सही प्रतीत होते हैं और वह जमानत के लिए आवश्यक दायित्व को पूरा करने में विफल रहे हैं. बेंच ने बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी के हक का जिक्र करते हुए कहा था कि इस अधिकार का मतलब ये नहीं है कि भड़काऊ भाषण देकर देश के हितों और अखंडता का नुकसान पहुंचाया जाए.
साल 2019 में शब्बीर शाह की गिरफ्तारी हुई थी और 4 अक्टूबर, 2019 में एनआईए की दूसरी चार्जशीट में उन्हें आरोपी के तौर पर नामित किया गया. शब्बीर शाह पर जम्मू कश्मीर में अलगाववादी आंदोलन को बढ़ावा देने में मुख्य भूमिका निभाने का आरोप है. उन पर मारे गए आतंकवादियों को उनके घर जाकर श्रद्धांजलि देने, हवाला के जरिए पैसा लेने और सीमा पार से व्यापार के माध्यम से धन जुटाकर इसका इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों में करने के भी आरोप हैं.
