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अगर याचिका लगाने वाला वकील नहीं होता तो उस पर जुर्माना भी लगाया जाता-सीजेआई सूर्यकांत


सुप्रीम कोर्ट में सोमवार (9 मार्च) को शराब से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान सीजेआई भड़क उठे। उन्होंने याचिका लगाने वाले वकील को चेतावनी दी और कहा कि दोबारा ऐसी याचिका लगाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने साफ किया कि यह एक और उदाहरण है, जिसमें बिना दिमाग लगाए याचिका दायर की जाएगी। सीजेआई ने इस याचिका को बेबुनियाद बताया और कहा कि अपील साफ नहीं हैं। ऐसे में याचिका को खारिज किया जाता है। यह खराब ड्राफ्टिंग का उदाहरण है।

बार एंड बेंच के मुताबिक कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता कानून के अनुसार संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर सकता है। इस याचिका में शराब की तय मात्रा का सुझाव जरूरी करने की मांग की गई थी। इसके साथ ही तामसिक भोजन को लेकर भी नियम बनाने के लिए कहा गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने एक वकील द्वारा खुद पिटीशनर के तौर पर फाइल की गई कई जनहित याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया। सीजेआई सूर्यकांत ने गुस्से में कहा, "आधी रात को यह सब पिटीशन ड्राफ्ट करते हो क्या?" पिटीशन में शराब के फिक्स्ड प्रिस्क्रिप्शन को जरूरी बनाने और तामसिक खाने पर रेगुलेशन की अपील की गई थी। पिटीशन में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के मुद्दों वगैरह का भी जिक्र किया गया।

सीजेआई की अगुवाई वाली बेंच ने अपने आदेश में कहा कि यह पिटीशन दिमाग न लगाने का एक और उदाहरण है। मांग साफ नहीं हैं, बेबुनियाद हैं और खारिज कर दी गई हैं। यह खराब ड्राफ्टिंग का उदाहरण है। अगर पिटीशनर वकील नहीं होता तो हम बहुत ज्यादा खर्च के साथ याचिका खारिज करते। इस मामले में कोर्ट ने कोई जुर्माना नहीं लगाया, लेकिन दोबारा ऐसा होने पर याचिकाकर्ता पर जुर्माना लगाने की बात कही। सीजेआई ने कहा कि यह याचिका कैज़ुअल ड्राफ्टिंग और सुप्रीम कोर्ट पर बोझ डालने का एक उदाहरण है। अगली बार जब आप ऐसी पिटीशन फाइल करेंगे, तो बहुत ज्यादा जुर्माना लगाया जाएगा। उन्होंने गुस्से में कहा कि तुम लोगों ने ऐसी बहुत दुकानें चला रखी हैं।

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