मिडिल ईस्ट संकट पर एक्शन में भारत सरकार! अमित शाह की अध्यक्षता में बनाई कमेटी
March 12, 2026
ईरान में जारी संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने स्थिति पर करीब से नजर रखने और संभावित प्रभावों से निपटने के लिए तीन सदस्यीय मंत्री समूह का गठन किया है. इस उच्चस्तरीय समिति की अध्यक्षता गृह मंत्री अमित शाह करेंगे. हालांकि सरकार का कहना है कि अभी देश पर इसका कोई खास असर देखने को नहीं मिल रहा है. सरकार कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रही है और पहले ही तैयारी के मूड में दिख रही है.
केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह के अलावा इस मंत्री समूह में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी शामिल हैं. विदेश मंत्रालय जहां कूटनीतिक स्तर पर हालात की समीक्षा करेगा, वहीं पेट्रोलियम मंत्रालय वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ने वाले असर का विश्लेषण करेगा. खास तौर पर एलपीजी की संभावित कमी या आपूर्ति बाधित होने की स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक स्रोतों और आपूर्ति प्रबंधन पर भी विचार किया जा रहा है.
कई इलाकों में हालांकि एलपीजी सिलेंडरों की कमी देखने को मिल रही है और लोगों को इस कमी के चलते कठिनाइयों का का सामना भी करना पड़ रहा है. सरकार ने संकेत दिए हैं कि घरेलू उपभोक्ताओं को किसी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए अग्रिम तैयारियां की जा रही हैं. तेल कंपनियों को पर्याप्त भंडारण बनाए रखने और वितरण व्यवस्था को सुचारु रखने के निर्देश दिए गए हैं. यह मंत्री समूह अन्य संबंधित मंत्रालयों के साथ मिलकर लगातार स्थिति की समीक्षा करेगा, ताकि संकट का देश की ऊर्जा सुरक्षा और आम लोगों की जरूरतों पर न्यूनतम प्रभाव पड़े.
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बात की थी, जिसके बाद ईरान ने भारतीय जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की परमिशन दी. ये दो जहाज बुधवार रात से गुरुवार सुबह के बीच ट्रांजिट कर रहे हैं. भारत में तेल की बढ़ती किल्लत के बीच ये बड़ी राहत है क्योंकि युद्ध शुरू होने के बाद से ज्यादातर जहाज वहां फंसे हुए हैं और ट्रैफिक लगभग बंद हो गया है. इन दोनों जहाजों के निकलने से भारत में तेल की किल्लत कुछ हद तक खत्म हो जाएगी.
