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चैत्र अमावस्या कब है? इस दिन हावी रहती हैं नकारात्मक शक्तियां


हिंदू धर्म में अमावस्या का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन स्नान-दान के साथ ही पितृ पूजा, पितरों का तर्पण और पिंडदान किया जाता है। अमावस्या के दिन ऐसा करने से व्यक्ति को पुण्यकारी लाभ मिलते हैं। आपको बता दें कि हर माह में आने वाली अमावस्या का खास महत्व होता है। ऐसे ही चैत्र माह की अमावस्या भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को भूतड़ी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। यह दिन तंत्र और मंत्र की सिद्धि के लिए उत्तम माना गया है। मान्यताओं के अनुसार, भूतड़ी अमावस्या के दिन नकारात्मक शक्तियां हावी रहती हैं। ऐसे में इस दिन विशेष रूप से सावधानी बरतनी चाहिए। तो आइए जानते हैं कि इस साल भूतड़ी अमावस्या कब मनाई जाएगी। साथ ही जानेंगे कि नकारात्मक शक्तियों से बचने के लिए क्या उपाय करने चाहिए।
चैत्र अमावस्या (भूतड़ी अमावस्या) 2026 कब है?

पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि का आरंभ 18 मार्च को सुबह 8 बजकर 25 मिनट पर होगा। अमावस्या तिथि का समापन 19 मार्च 2026 को सुबह 6 बजकर 52 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार, भूतड़ी अमावस्या 19 मार्च 2026 को है।
चैत्र अमावस्या (भूतड़ी अमावस्या) 2026 स्नान-दान मुहूर्तब्रह्म मुहूर्त- 05:08 ए एम से 05:56 ए एम
प्रातः संध्या 05:32 ए एम से 06:44 ए एम
अभिजित मुहूर्त- 12:22 पी एम से 01:11 पी एम
विजय मुहूर्त- 02:47 पी एम से 03:36 पी एम
चैत्र अमावस्या के दिन नकारात्मक शक्तियों से बचने के लिए क्या उपाय करें?

माना जाता है कि चैत्र अमावस्या यानी भूतड़ी अमावस्या के दिन नकारात्मक शक्तियां उग्र हो जाती हैं। अतृप्त आत्माएं अपनी अधूरी इच्छा को पूरी करने के लिए लोगों के शरीर को अपना शिकार बनाती हैं। ऐसे में बुरी शक्तियों से बचने के लिए गंगा या अन्य किसी पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। स्नान के बाद गरीब और जरूरतमंदों को अन्न, धन, वस्त्र और भोजन का दान अवश्य करें। इसके अलावा नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव से बचने के लिए भूतड़ी अमावस्या के दिन हनुमान चालीसा का पाठ और महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी अवश्य करें।

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