इजरायल और अमेरिकी हमले में खामेनेई की मौत पर भड़के ओवैसी
March 02, 2026
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत पर असदुद्दीन ओवैसी ने अमेरिका-इजरायल के हमले को अमानवीय और अनैतिक बताया. शनिवार को एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि खामेनेई शिया मुसलमानों के सर्वोच्च नेता थे. उनकी हत्या करके उम्मीद कैसे की जा सकती है कि ईरान चुप रहेगा? उन्होंने मांग की कि भारत को भी खामेनेई की इस गैरकानूनी मौत की निंदा करनी चाहिए.
ओवैसी ने साफ कहा कि यह हमला रमजान के पवित्र महीने में किया गया. ट्रंप और नेतन्याहू को इंसानियत पर यकीन नहीं है. जेनेवा में ईरान-अमेरिका की बातचीत चल रही थी जो सफलता के बहुत करीब पहुंच गई थी, लेकिन अमेरिका ने उन वार्ताओं को रोककर इजरायल के साथ मिलकर हमला कर दिया. उन्होंने याद दिलाया कि अमेरिका ने पहले इराक और लीबिया में भी ऐसा ही किया था. अब इजरायल लगातार ईरान और फिलिस्तीन पर हमले कर रहा है. यह युद्ध बिल्कुल गैरकानूनी है क्योंकि कोई खतरा नहीं था.
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25-26 फरवरी वाली इजरायल यात्रा को असमय बताया. ओवैसी ने पूछा- अगर पीएम का विमान हवा में होता और हमला हो जाता तो क्या होता? इजराइल ने मोदी की यात्रा का फायदा उठाया. अगर नेतन्याहू ने पहले सूचना दी थी तो मोदी को यात्रा रुकवानी चाहिए थी. अगर नहीं दी तो धोखा हुआ. इससे भारत की 80 साल पुरानी तटस्थ नीति खत्म हो गई. मोदी सरकार की विदेश नीति नाकाम रही. अब लगता है हमने एक पक्ष चुन लिया है.
ओवैसी ने भारत के हितों पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि इस इलाके में करीब एक करोड़ भारतीय काम करते हैं जो घर पैसा भेजते हैं. तेल की कीमतें बढ़ेंगी तो भारत को भारी नुकसान होगा. दुबई में उड़ानें रद्द हो गई हैं, लोग फंस गए हैं. ईरान में कई भारतीय और मक्का-मदीना जाने वाले भारतीय मुसलमान भी फंसे हुए हैं. उन्होंने कहा कि यह भारत का मौका था विश्वगुरु बनने का लेकिन हम चुप हैं. MEA और BJP के बयान से समस्या नहीं सुलझेगी.
पीएम मोदी की इजरायल यात्रा में दोनों देशों ने रक्षा और व्यापार पर कई समझौते किए थे. ठीक दो दिन बाद 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला किया जिसमें खामेनेई शहीद हो गए. ईरान ने तुरंत जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी. भारत सरकार ने नागरिकों की सुरक्षा के लिए सतर्कता बरतने की अपील की है.
इस हमले ने मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा दिया है. ओवैसी जैसे नेताओं के बयान से साफ है कि भारत को दोनों तरफ संतुलन बनाए रखना चाहिए ताकि लाखों भारतीयों की जान-माल और देश की अर्थव्यवस्था सुरक्षित रहे. आम लोग भी सोच रहे हैं कि आगे क्या होगा और भारत की तटस्थ छवि कैसे बचेगी.
