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पूरा गणित! मिडिल ईस्ट जंग की वजह से फ्लाइट टिकट कैसे होगा महंगा


मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच दुनियाभर में कच्चा तेल महंगा हो गया. इसका असर भारत पर देखने को मिल रहा है. इस बीच 1 अप्रैल से हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन, यानी Aviation Turbine Fuel (ATF) के नए दाम लागू होंगे. हर महीने की 1 तारीख को ही दाम अपडेट होते है तो पिछले महीने जंग की शुरुआत में 1 मार्च के दौरान जंग का असर नहीं दिखा था पर अब स्थिति अलग हो चुकी है. आज भी पश्चिम एशिया में जारी जंग की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम पहले से ऊपर हैं. इस वजह से रुपया भी कमज़ोर हो गया है. इस तरह से दोनों मिलकर ATF महंगा करने का पूरा माहौल बना रहे हैं.

ATF के महंगा होने पर इसका सीधा असर आपके टिकट पर दिखेगा. एयरलाइंस की लागत बढ़ेगी और उसका बोझ आखिरकार आम यात्री को ही उठाना पड़ेगा. छुट्टी का प्लान हो, इमरजेंसी में फ्लाइट लेनी हो या अचानक कहीं जाना पड़े तो सबका बजट बिगड़ सकता है.

हर महीने की 1 तारीख को IOC, BPCL और HPCL मिलकर ATF के नए दाम तय करते हैं. बेस प्राइस, केंद्रीय उत्पाद शुल्क, राज्य VAT और डीलर कमीशन इन सबको जोड़कर जो कीमत बनती है वही एयरलाइंस को चुकानी पड़ती है और किसी भी एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च का 30 से 40 फीसदी हिस्सा अकेले ATF होता है. यानी ATF थोड़ा भी महंगा हुआ तो एयरलाइन की लागत सीधे बढ़ती है और वह बोझ आखिरकार यात्री के टिकट पर आ जाता है.

ATF की कीमत में सबसे बड़ा पेच राज्यों का VAT यानी बिक्री कर है. महाराष्ट्र में ATF पर करीब 25 फीसदी VAT है, दिल्ली में 20 फीसदी से ऊपर, जबकि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना ने VAT घटाकर 1 फीसदी तक कर दिया और नतीजा यह रहा कि वहां एविएशन तेज़ी से बढ़ा ! एक ही ATF मुंबई में महंगा और हैदराबाद में सस्ता सिर्फ राज्य के टैक्स की वजह से केंद्र चाहकर भी सीधे दखल नहीं दे सकता यही दिक्कत है

ATF अभी तक GST के दायरे में नहीं आया है. पेट्रोल-डीज़ल की तरह यह भी राज्यों के हाथ में है. इसीलिए केंद्र सरकार चाहे तो भी सीधे VAT तय नहीं कर सकती सिर्फ अपील कर सकती है. यही वजह है कि एविएशन मंत्री को राज्यों के मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी लिखने की तैयारी में है, जिसमें ATF पर VAT घटाने की गुज़ारिश होगी. राज्यों के वित्त विभागों को भी अलग से पत्र भेजा जाएगा.

एविएशन मिनिस्टरी का कहना है कि वो एयरलाइंस, यात्री और एयरपोर्ट तीनों को ध्यान में रखकर विकल्प तलाश रही है. इसी कड़ी में एयरपोर्ट ऑपरेटर्स के साथ भी बैठक होगी, जिसमें यात्रियों से वसूले जाने वाले अलग-अलग चार्जेज की समीक्षा की जाएगी और मकसद यह है कि एक तरफ ईंधन महंगा हो तो दूसरी तरफ से राहत दी जा सके.

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