साइबर ठगी के पैसों को ठिकाने लगाने का नया पैंतरा, पेट्रोल पंप के जरिए कैश में बदल रहे थे रकम
March 31, 2026
साइबर अपराधियों ने ठगी से हासिल रकम को निकालने का नया तरीका अपनाया है। अब सीधे पैसे निकालने के बजाय वे रकम को कई बैंक खातों में घुमाकर अंत में पेट्रोल पंप के माध्यम से नकद में बदल रहे हैं। मुंबई की सर जेजे मार्ग पुलिस ने इस तरह के एक संगठित नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिसकी पहचान राहुल कुमार शैतानमल सेन (23 वर्ष) के रूप में हुई है।
प्राथमिक रूप से मिली जानकारी के मुताबिक, आरोपी मूल रूप से राजस्थान के पाली का रहने वाला है और कमीशन के बदले पेट्रोल पंप के जरिए संदिग्ध खातों में पैसों के लेन-देन में शामिल था। इस मामले में पुलिस ने अन्य संदिग्धों आफताब इमरान सय्यद, मोहम्मद शादाब अशफाक खान, अब्दुल कादिर अल्लाउद्दीन, अमित सुभाषचंद्र मिश्रा और सनोज उर्फ पिंटू सिंह से भी पूछताछ की है। फिलहाल, इन्हें नोटिस देकर छोड़ा गया है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह पहले ऑनलाइन धोखाधड़ी के जरिए पैसे जुटाता था। इसके बाद इस रकम को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर स्रोत को छिपाया जाता था। अंत में यह पैसा पेट्रोल पंप के खातों में भेजा जाता, जहां से इसे नकद में परिवर्तित कर लिया जाता था।
गिरोह के सदस्य पेट्रोल पंप पर ग्राहकों से नकद राशि लेते थे और उसी के बराबर रकम अपने उन संदिग्ध बैंक खातों से पेट्रोल पंप के खाते में ट्रांसफर कर देते थे। इस प्रक्रिया के जरिए डिजिटल ठगी की रकम को साफ कर नकद में बदल दिया जाता था। गिरफ्तार आरोपी इस नेटवर्क में 'कैश कन्वर्जन एजेंट' के तौर पर काम कर रहा था। पुलिस ने आरोपी के पास से 47 हजार रुपये नकद, कई मोबाइल फोन और बैंक लेन-देन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। साथ ही, विभिन्न बैंक खातों में जमा रकम को फ्रीज कर दिया गया है।
पुलिस का मानना है कि इस गिरोह के तार अन्य शहरों और राज्यों तक फैले हो सकते हैं। पूरे मामले का खुलासा बैंक ट्रांजेक्शन की तकनीकी जांच और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर हुआ है। फिलहाल, पुलिस मुख्य साजिशकर्ता और अन्य इस ग्रुप के सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है।
