प्रतापगढ़/बाबागंज। सरकार जहां आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक पोषण सामग्री समय पर पहुंचाने का दावा कर रही है, वहीं बाबागंज ब्लॉक के बाल विकास परियोजना कार्यालय में तैनात एक बड़े बाबू और मुख्य सेविका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने बड़े बाबू पर राशन कम देने और मनमानी करने का आरोप लगाया है, जबकि नियमों के विपरीत गृह ब्लॉक में तैनाती को लेकर भी विभागीय मिलीभगत की चर्चा तेज हो गई है।
प्रतापगढ़ जिले के बाबागंज ब्लॉक स्थित बाल विकास परियोजना कार्यालय इन दिनों अनियमितताओं और मनमानी के आरोपों को लेकर चर्चा में है। यहां गृह ब्लाक में तैनात बड़े बाबू पर कई आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि केंद्रों के लिए आने वाले राशन का पूरा वितरण नहीं किया जा रहा है और उन्हें निर्धारित मात्रा से कम राशन दिया जा रहा है।
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का कहना है कि जब इस मामले को लेकर सवाल उठाया जाता है तो बड़े बाबू द्वारा मनमाने तरीके से जवाब दिया जाता है और शिकायत करने पर कार्रवाई की धमकी तक दी जाती है। इससे कार्यकत्रियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनमें डर इस बात का है कि यदि उन्होंने बड़ेबाबू की शिकायत की तो उनके खिलाफ कार्यवाही हो सकती है। विधान केसरी द्वारा जब इन आरोपों की पुष्टि के लिए जाल बुना गया तो बड़ेबाबू ने टीम को अपने पाले में लाने का प्रयास किया लेकिन वो सफल नही हो सका।
इसी ब्लाक में विभागीय नियमों के विपरीत एक मुख्य सेविका की तैनाती उसके गृह ब्लॉक में ही कर दी गई है जबकि शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी कर्मचारी को उसके गृह क्षेत्र में तैनाती नहीं दी जानी चाहिए, ताकि निष्पक्षता बनी रहे। इसके बावजूद इस नियम की अनदेखी किए जाने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पूरे मामले में जिला कार्यक्रम अधिकारी ज्योति शाक्य की भी भूमिका संदिग्ध है क्योकि इस संबंध में जब उनसे जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो पूरा मामला सुनने के बाद उन्होंने जवाब देने के बजाय फोन ही काट दिया।
अब देखना यह है कि पोषण योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की बात करने वाला विभाग इस गंभीर आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है, या फिर मामला इसी तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।इलाके के लोगों ने डीएम से गुपचुप जांच कराकर कार्यवाही की मांग की है।
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