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12 दिनों की जंग के बावजूद ईरानी शासन के खत्म होने का खतरा नहीं-इंटेलिजेंस


अमेरिका-इजरायल की ओर ईरान पर हमले किए जा रहे हैं तो वहीं तेहरान की ओर से भी पलटवार जारी है। जंग के बीच मामले से जुड़े 3 सूत्रों के मुताबिक, US इंटेलिजेंस की रिपोर्ट से पता चलता है कि ईरान की लीडरशिप अभी भी काफी हद तक बनी हुई है और 12 दिनों की लगातार बमबारी के बाद भी शासन के खत्म होने का खतरा नजर नहीं आ रहा है।

एक सूत्र ने कहा कि कई इंटेलिजेंस रिपोर्ट से लगातार ऐसे संकेत मिले हैं कि ईरानी शासन के खत्म होने का कोई खतरा नहीं है। शासन का ईरान की जनता पर कंट्रोल बना हुआ है। सूत्र ने कहा कि लेटेस्ट रिपोर्ट पिछले कुछ दिनों में पूरी हुई है और उन्हें नाम बताने की इजाजत नहीं है।

जंग की वजह से तेल की बढ़ती कीमतों का व्यापक असर अब नजर आने लगा है। ऐसे में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वो 2003 के बाद से सबसे बड़े मिलिट्री ऑपरेशन को जल्द ही खत्म कर देंगे। भले ही ट्रंप कुछ भी कहें लेकिन अगर ईरान के कट्टरपंथी नेता मजबूती से जमे रहे तो जंग का कोई सही अंत खोजना बेहद मुश्किल साबित होने वाला है।

अमेरिकी इंटेलिजेंस रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि ईरान के धार्मिक लीडरशिप में एकता है, भले ही 28 फरवरी को सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई हो। एक सीनियर इजरायली अधिकारी ने भी कहा है कि इजरायली अधिकारियों की बंद कमरे में हुई बातचीत में माना है कि पक्के तौर पर यह नहीं कहा जा सकता कि जंग से ईरान में धार्मिक सरकार गिर जाएगी।

इस बीच सूत्रों ने जोर देकर कहा कि जमीन पर हालात बदलते रहते हैं और ईरान के अंदर के हालात भी बदल सकते हैं। जंग शुरू होने के बाद से अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई ठिकानों पर हमला किया है, जिसमें एयर डिफेंस, न्यूक्लियर साइट और सीनियर लीडरशिप के सदस्य शामिल हैं।

अमेरिकी इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स से पता चलता है कि IRGC और खामेनेई की मौत के बाद सत्ता संभालने वाले अंतरिम नेताओं का देश पर कंट्रोल बना हुआ है। सीनियर शिया मौलवियों के एक ग्रुप, द असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने इस हफ्ते की शुरुआत में खामेनेई के बेटे, मुज्तबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया है।

यूएस इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स ने ईरानी कुर्द ग्रुप्स की ईरानी सिक्योरिटी सर्विसेज के खिलाफ लड़ाई जारी रखने की काबिलियत पर भी शक जताया है। कहा गया है कि इंटेलिजेंस से पता चलता है कि ग्रुप्स के पास फायरपावर और संख्या की कमी है। ऐसे में साफ है कि ईरान को लेकर अमेरिका का प्लान आसानी से सफल नहीं होने वाला है।

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