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कराची में अमेरिकी कॉन्सुलेट को फूंकने वालों पर फायरिंग, 10 की मौत


ईरान में गूंजे धमाकों ने पश्चिम एशिया को एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान के कराची में अमेरिकी कॉन्सुलेट पर बड़ा हमला किया गया है। खामेनेई की मौत के विरोध में पाकिस्तानी नागरिकों ने इस हमले को अंजाम दिया है। एक्स हैंडल पर इसका एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। वीडियो में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि, पाकिस्तानी लोगों की भीड़ कैसे अमेरिकी कॉन्सुलेट पर उपद्रव कर रही है। इस दौरान उन्होंने जमकर तोड़फोड़ की और एक हिस्से को आग लगा दी। जैसे-जैसे हिंसा बढ़ रही थी वैसे-वैसे उपद्रवी और हावी होते जा रहे थे। इसी बीच प्रदर्शनकारियों पर जमकर फायरिंग की गई​ जिसमें 10 की मौत हो गई है।

कराची में जब अमेरिकी कॉन्सुलेट पर पाकिस्तानी नागरिकों ने हमला किया और आग लगा दी। उसके बाद से ही घटनास्थल पर हालात बिगड़ने लगे। देखते ही देखते ही मौके पर सैकड़ों लोगों की भीड़ जुटने लगी। इसे देखते हुए वहां जब हालात काबू से बाहर हो गए तो प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी जिसमें 10 लोगों की मौत हो गई और कई लोगों के घायल होने की आशंका जताई जा रही है। इसके कुछ देर बाद ये भी खबर सामने आई कि, दंगाइयों ने गि​लगित बालटिस्तान में यूएन का दफ्तर फूंक दिया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को हमले तेज न करने की चेतावनी देते हुए रविवार को ऑनलाइन माध्यम से कहा कि अमेरिका 'ऐसी ताकत के साथ जवाब देगा जो पहले कभी नहीं देखा गया होगा।' ट्रंप ने ट्रुथ सोशल के जरिए रविवार को ये टिप्पणियां ऐसे समय में की जब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या की जिम्मेदारी स्वीकार करने के बाद उन्हें धमकियां मिली हैं। ट्रंप ने लिखा, 'ईरान ने अभी-अभी कहा है कि वे आज बहुत जोरदार हमला करेंगे, जितना उन्होंने पहले कभी नहीं किया।' उन्होंने पोस्ट किया, 'लेकिन उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि अगर उन्होंने ऐसा किया, तो हम उन पर ऐसी ताकत से हमला करेंगे जो पहले कभी नहीं देखा गया होगा।'

अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद मौलवियों की एक समिति को उनके स्थान पर नए नेता के चयन का काम सौंपा गया है। ईरान के संविधान के तहत 88 सदस्यीय समिति 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' (विशेषज्ञों की सभा) नये सर्वोच्च नेता का चयन करेगी। इस निकाय में केवल शिया धर्मगुरु शामिल होते हैं, जिन्हें हर आठ वर्ष में जनमत के आधार पर चुना जाता है। कानून के अनुसार, 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' को जल्द से जल्द नये सर्वोच्च नेता का चयन करना होगा।

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