सोच समझकर चुनें नमक, पिंक सॉल्ट खाने से बच्चों में बढ़ रहा है थायरॉइड, ये हैं आयोडीन की कमी के लक्षण
February 26, 2026
इन दिनों साधारण नमक की जगह लोग पिंक सॉल्ट यानि गुलाबी नमक का इस्तेमाल करने लगे हैं। पोटेशियम और मैग्नीशियम की मात्रा थोड़ी अधिक होने की वजह से लोग नॉर्मल आयोडीन की जगह पिंक सॉल्ट, हिमालयन सॉल्ट और सेंधा नमक का इस्तेमाल करने लगे हैं। लेकिन लंबे समय कर इस तरह के नमक का इस्तेमाल करने से शरीर में आयोडीन की कमी होने लगती है। जिसे लेकर बेंगलुरु के एक बाल रोग विशेषज्ञ एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉक्टर तेजस्वी शेषाद्री ने एक चेतावनी भरा वीडियो शेयर किया है।
डॉक्टर ने बताया कि जिस नमक को आप सेहत के लिए फायदेमंद मानकर खा रहे हैं और एक ट्रेंड के चलते सभी इस्तेमाल कर रहे हैं उसका सेवन आपको थायरॉइड और घेंघा जैसी बीमारियां हो सकती हैं। डॉक्टर ने बताया कि उनके पास एक बच्चा आया था जो घेंघा रोग से पीड़ित था। उसकी थायरॉइड ग्रंथि का आकार बढ़ा हुआ था। शुरुआत में ये बड़ा अजीब मामला लगा, क्योंकि बच्चे का थायरॉइड स्तर कम था और थायरॉइड एंटीबॉडीज़ की रिपोर्ट भी नेगेटिव थी। लेकिन जब परिवार से उनके खानपान को लेकर पूछा गया तो पता चला कि बच्चा 2 साल से गुलाबी नमक का सेवन कर रहा था।
गुलाबी नमक को अक्सर मैग्नीशियम और पोटेशियम जैसे माइक्रो मिनरल से भरपूर नेचुरल पोषक तत्व बताकर बेचा जाता है, लेकिन डॉक्टर ने बताया कि इसके फायदे सिर्फ दिखावटी हैं। कई लोग गुलाबी नमक का इस्तेमाल करने लगते हैं, यह सोचकर कि इसमें सोडियम कम होता है और यह हार्ट के लिए बेहतर है। जबकि ये धारणा गलत है। गुलाबी नमक में पर्याप्त आयोडीन नहीं होता। उन्होंने बताया कि 20वीं सदी की शुरुआत में, घेंघा रोग की वैश्विक महामारी को खत्म करने के लिए जानबूझकर खाने के नमक में आयोडीन मिलाया गया था।
बिना आयोडीन वाले नमक का लगातार सेवन हाइपोथायरायडिज्म, बालों का झड़ना, बहुत ज्यादा थकान और बच्चों में विकास संबंधी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। डॉक्टर ने चेतावनी देते हुए कहा, 'थायराइड हार्मोन के कार्य के लिए आयोडीन बहुत महत्वपूर्ण है और गुलाबी नमक का लगातार सेवन आयोडीन की कमी का कारण बन सकता है।'
