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कर्नाटक के दरगाह में महाशिवरात्रि पूजा रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका


कर्नाटक के कलबुर्गी के लाडले मशायक दरगाह में महाशिवरात्रि की पूजा रोकने के लिए दरगाह कमेटी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है. कमेटी ने मांग की है कि परिसर में पूजा की अनुमति न दी जाए. उसका कहना है कि इसके जरिए दरगाह के धार्मिक स्वरूप को बदलने की कोशिश की जा रही है. बुधवार (11 फरवरी, 2025) को मामला चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने रखा गया. उन्होंने कहा कि इसे सुनवाई के लिए लगाया जाएगा.

याचिकाकर्ता का तर्क है कि पिछले कुछ सालों में हाई कोर्ट के आदेश से वहां शिवरात्रि पर पूजा हो रही है. इसके अलावा भी सुनियोजित तरीके से जगह का धार्मिक चरित्र बदलने की कोशिश हो रही है. इसके लिए कोर्ट से अलग-अलग अंतरिम आदेश हासिल किए जा रहे हैं. याचिकाकर्ता के लिए पेश वरिष्ठ वकील विभा दत्त मखीजा ने 15 फरवरी को होने वाली महाशिवरात्रि से पहले इस मामले पर तत्काल सुनवाई की मांग की.

मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने हर मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट आने की प्रवृत्ति पर चिंता जताई. उन्होंने कहा, 'आजकल हर मामला सीधे अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट क्यों आ रहा है? इससे ऐसा संदेश जाता है जैसे उच्च न्यायालय निष्क्रिय हो गए हैं.' हालांकि, चीफ जस्टिस ने याचिका पर विचार करने और जल्द सुनवाई की संभावना तलाशने की बात कही है. फिलहाल पूजा पर कोई रोक नहीं लगाई गई है

अलंद दरगाह भी कही जाने वाली यह जगह 14वीं सदी की के सूफी संत हजरत शेख अलाउद्दीन अंसारी से जुड़ी बताई जाती है. वहीं, हिंदू पक्ष इसे 15वीं सदी के संत राघव चैतन्य से जुड़ा बताते हैं. परिसर में एक शिवलिंग भी है जिसे राघव चैतन्य शिवलिंग कहा जाता है. साल 2022 में यहां पूजा के अधिकार को लेकर सांप्रदायिक हिंसा हुई थी. 2025 में कर्नाटक हाई कोर्ट ने कड़ी सुरक्षा के बीच 15 लोगों को दोपहर 2 से 6 बजे तक पूजा की अनुमति दी थी.

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