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10 साल से रुके महंगाई भत्ता पर सुप्रीम कोर्ट का ममता सरकार को सख्त आदेश


पश्चिम बंगाल सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने निर्देश दिया है कि राज्य सरकार अपने कर्मचारियों को साल 2009 से 2019 तक का बकाया महंगाई भत्ता (DA) जारी करे. कोर्ट ने कहा है कि मार्च तक यह राशि कर्मचारियों तक पहुंचा दी जाए. कोर्ट ने इसे कर्मचारियों का वैधानिक अधिकार करार दिया है.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने कहा कि एक बार वैधानिक नियमों के अनुसार ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI) के तहत महंगाई भत्ते की गणना होने के बाद राज्य सरकार ज्ञापन के जरिए इसकी गणना में बदलाव नहीं कर सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने भुगतान की प्रक्रिया निर्धारित करने के लिए पूर्व जस्टिस इंदू मल्होत्रा की अध्यक्षता में एक स्पेशल कमेटी बनाई है. कमेटी में हाईकोर्ट के दो रिटायर्ड मुख्य न्यायाधीश और कैग (CAG) के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे. कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील पर यह फैसला सुनाया है. राज्य सरकार ने पिछली उन कानूनी हारों के खिलाफ याचिक दाखिल की थी, जिनमें कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया गया.

सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फैसले को आंशिक रूप से बरकरार रखा है, जिसमें बंगाल सरकार को रिवीजन ऑफ पे एंड अलाउंसेज रूल्स (ROPA) में मौजूद AICPI के तहत गणना करके महंगाई भत्ता देने का निर्देश दिया गया था. कोर्ट ने कहा कि ROPA नियमों के तहत परिलब्धियों की गणना के लिए डीए अनिवार्य है. कोर्ट ने राज्य सरकार की उन दलीलों को भी खारिज कर दिया, जिनमें वित्तीय क्षमता का हवाला देकर भत्ते से इनकार कर किया गया था.

यह विवाद साल 2008 में पांचवें वेतन आयोग के बाद बने बंगाल के ROPA रूल्स, 2009 के तहत राज्य के सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में देरी से जुड़ा है. साल 2016 में कई एंप्यूलॉई यूनियंस ने पश्चिम बंगाल प्रशासनिक न्यायाधिकरण में शिकायत दर्ज कराई थी कि ROPA से AICPI लिंक करने

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