प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज ने हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनाव को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. उन्होंने गुरुवार (5 फरवरी, 2026) को याचिका दाखिल की, जिसमें खासतौर पर बिहार की मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना को चुनौती दी गई है. उनका कहना है कि सरकार ने आचार संहिता लागू होने के दौरान न सिर्फ 25-35 लाख महिलाओं के खाते में 10 हजार रुपये ट्रांसफर किए, बल्कि नए लाभार्थियों को भी स्कीम में जोड़ा और यह तरीका गैरकानूनी है. उन्होंने कोर्ट से गुजारिश की है कि वह चुनाव आयोग को चुनाव प्रभावित करने वाली मुफ्त और कल्याणकारी योजनाएं शुरू करने के लिए सत्ताधारी पार्टी के लिए छह महीनों की समयसीमा निर्धारित करने का निर्देश दे.
बिहार चुनाव में अवैध प्रक्रियाओं का आरोप लगाते हुए जनसुराज ने रिट याचिका फाइल की है. पार्टी ने खासतौर पर बिहार सरकार की मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना को चुनौती दी और कहा कि आचार संहिता लागू होते हुए योजना के तहत महिलाओं के खाते में सीधे 10 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए. राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए 6 और 11 नवंबर को मतदान हुआ और 14 नवंबर को नतीजों की घोषणा की गई.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच शुक्रवार को याचिका पर सुनवाई करेगी. जनसुराज ने अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दाखिल की है. याचिका में मांग की गई है कि आचार संहिता लागू होते हुए महिलाओं के खाते में पैसे ट्रांसफर करना और नए लाभार्थियों को जोड़े जाने को गैरकानूनी ठहराया जाए. उन्होंने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 112, 202 और 324 का उल्लंघन है.
जनसुराज की याचिका में कहा गया कि चुनाव आयोग को आर्टिकल 324 और रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल्स एक्ट के सेक्शन 123 के तहत कार्रवाई करने का निर्देश दिया जाए. याचिकाकर्ता का कहना है कि बिहार चुनाव के दौरान 25-35 लाख महिला वोटर्स को 10-10 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए. याचिकाकर्ता का यह भी आरोप है कि सेल्फ हेल्प ग्रुप JEEVIKA की 1.8 लाख महिला लाभार्थियों को दोनों चरणों के चुनाव में पोलिंग बूथ पर नियुक्त किया जाना भी गैरकानूनी है.
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने आदेश का हवाला देते हुए उससे अपील की है कि बिहार चुनाव फिर से करवाए जाएं और चुनाव आयोग को मुफ्त योजनाओं और डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर स्कीम के लिए दिशानिर्देश तैयार करने का आदेश दे.
जनसुराज ने यह भी मांग की है कि चुनाव आयोग सत्ताधारी दल के लिए मुफ्त और कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा के लिए कम से कम छह महीने का समय निर्धारित करे यानी चुनाव से छह महीने पहले ही इन योजनाओं की घोषणा की जा सके. बिहार की मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना 26 सितंबर, 2025 को शुरू की गई थी.
