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UGC का जिक्र! सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है-राष्ट्रपति


उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने से जुड़े विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर कई वर्गों की ओर से चिंता और विरोध जताया गया है. इस बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार (28 जनवरी, 2026) को कहा कि सरकार दलितों, पिछड़े वर्गों, वंचितों और आदिवासी समुदायों के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है.'

बजट सत्र की शुरुआत के मौके पर संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि सबका साथ, सबका विकास की परिकल्पना देश के सभी नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है. उन्होंने कहा कि साल 2014 की शुरुआत में सामाजिक सुरक्षा योजनाएं सिर्फ 25 करोड़ नागरिकों तक ही पहुंच पाती थीं, लेकिन मेरी सरकार के निरंतर कोशिशों से आज देश के करीब 95 करोड़ भारतीयों को सामाजिक सुरक्षा का कवच मिला है.

उन्होंने कहा कि मेरी सरकार दलितों, पिछड़े वर्गों, वंचितों और आदिवासी समुदायों के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है. हालाकिं, इस दौरान उन्होंने सीधे तौर पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के मुद्दे का उल्लेख नहीं किया.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, ‘संविधान के शिल्पकार बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने हमेशा समानता और सामाजिक न्याय पर जोर दिया. हमारा संविधान भी हमें इसी भावना से प्रेरित करता है.’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सामाजिक न्याय का मतलब है कि हर नागरिक को बिना किसी भेदभाव के अपने पूरे अधिकारों का इस्तेमाल करने का मौका मिले.

उन्होंने कहा, ‘सरकार सामाजिक न्याय के वास्तविक अर्थ को पूरा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और इसके नतीजे के तौर पर पिछले एक दशक में 25 करोड़ नागरिक गरीबी से बाहर निकले हैं. मेरी सरकार के तीसरे कार्यकाल में गरीबों को सशक्त बनाने का अभियान और तेज रफ्तार के साथ आगे बढ़ा है. मेरी सरकार सभी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और ईमानदारी को संस्थागत रूप दे रही है.’

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